₹5,000 पीबीआई बढ़ाने के प्रस्ताव को ठुकराया, कैडर निर्माण और नियमितीकरण पर लिखित आदेश की मांग
ब्यूरो रिपोर्ट शशांक मिश्रा
लखनऊ, 07 अक्टूबर। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर राजधानी में चल रहा आंदोलन बुधवार को और तेज हो गया। इको गार्डन में पिछले नौ दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे CHO प्रतिनिधियों और सरकार के बीच हुई वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। सरकार की ओर से PBI में ₹5,000 की बढ़ोतरी कर इसे ₹15,000 करने की बात कही गई, लेकिन CHO ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
CHO के आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश के साथ वार्ता कर अपनी प्रमुख मांगें मजबूती से रखीं। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि CHO को केवल PBI में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि PBI को पूर्ण रूप से वेतन में मर्ज करने, पृथक कैडर निर्माण, नियमितीकरण और सम्मानजनक वेतनमान की आवश्यकता है।
तीन प्रमुख मांगों पर अटका मामला
CHO संगठन ने सरकार के सामने पृथक कैडर का निर्माण एवं नियमितीकरण के लिए स्पष्ट और लिखित आदेश जारी करने की मांग रखी। इसके साथ ही PBI को पूर्ण रूप से वेतन/मानदेय में मर्ज करते हुए AB-HWC Operational Guideline के अनुरूप समान वेतन सुनिश्चित करने तथा हरियाणा की तर्ज पर ₹4,800 ग्रेड पे के अनुरूप वेतनमान, डीए-एचआरए समेत सभी सेवा लाभ दिए जाने की मांग की गई।
वार्ता में नियमितीकरण और पृथक कैडर निर्माण को लेकर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं हो सका। PBI में ₹5,000 की वृद्धि का प्रस्ताव सामने आया, लेकिन PBI को मूल वेतन में मर्ज करने की मांग पर सहमति नहीं बनी। वहीं ₹4,800 ग्रेड पे के अनुरूप वेतनमान की मांग भी अधर में रही।
स्वास्थ्य मंत्री के आवास तक पहुंचा आंदोलन
सरकार के साथ वार्ता बेनतीजा रहने के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे CHO ने स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास का घेराव किया और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से वर्षों से लंबित मांगों पर तत्काल सकारात्मक और लिखित निर्णय लेने की मांग की।
संगठन ने दो टूक कहा कि केवल ₹5,000 PBI वृद्धि के आधार पर आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। CHO का कहना है कि उनका संघर्ष वेतन में मामूली वृद्धि के लिए नहीं, बल्कि सेवा शर्तों में स्थायी सुधार और भविष्य की सुरक्षा के लिए है।
‘गांव-गांव स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे CHO’
ACHOUP ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी रीढ़ हैं। प्रत्येक जनपद और गांव में CHO सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं और सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। संगठन के मुताबिक हजारों CHO जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
संगठन ने कहा कि ऐसे में CHO की जायज मांगों और भावनाओं की अनदेखी करना गंभीर विषय है। सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना चाहिए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
2027 के चुनाव का भी दिया संकेत
ACHOUP ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि CHO की मांगों को लगातार अनसुना किया गया और समयबद्ध तरीके से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो समुदाय में सरकार के प्रति आक्रोश और असंतोष और बढ़ सकता है। संगठन ने संकेत दिया कि इसका असर आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।
CHO संगठन ने स्पष्ट किया कि आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। जब तक पृथक कैडर, नियमितीकरण, PBI मर्जर और सम्मानजनक वेतनमान जैसी प्रमुख मांगों पर लिखित एवं ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक इको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
