तूफान में गिरे पेड़ों की आड़ में हरे पेड़ों की कटान का आरोप, वन विभाग पर वसूली के भी सवाल


ब्यूरो रिपोर्ट अंकुल गुप्ता, सीतापुर ✍️

सकरन (सीतापुर)। करीब दस दिन पहले आए तूफान और तीन दिन तक हुई लगातार बारिश से सकरन क्षेत्र में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसी बीच ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि तूफान में गिरे पेड़ों की आड़ में क्षेत्र में हरे-भरे प्रतिबंधित पेड़ों का भी कटान कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत वन विभाग के अधिकारियों से की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सकरन में तैनात वन दरोगा राजकुमार की कथित मिलीभगत से कुछ लकड़ी ठेकेदारों द्वारा प्रतिबंधित पेड़ों का कटान कराया जा रहा है। उनका कहना है कि तूफान में बड़ी संख्या में पेड़ गिर गए थे, जिन्हें किसान मजबूरी में कम कीमत पर बेच रहे हैं। आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर हरे पेड़ों को भी कटवाया जा रहा है।

ग्रामीणों ने इन पेड़ों के कटान का लगाया आरोप

ग्रामीणों के अनुसार शुक्रवार को मोहलिया में 14 हरे आम के पेड़ काटे गए। वहीं मोहारी के एक बाग में पांच शीशम, चार जामुन, आठ आम और पांच गूलर के पेड़ काटे जाने का आरोप है। शनिवार को तारपारा में सात शीशम, तीन जामुन और छह गूलर के पेड़ों के कटान की बात भी ग्रामीणों ने कही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बिना आवश्यक परमिट के पेड़ों का कटान कराया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

गिरे पेड़ों को हटाने के नाम पर वसूली का आरोप

ग्रामीणों ने तूफान में गिरे पेड़ों को हटाने के नाम पर भी कथित वसूली के आरोप लगाए हैं। मोहारी के पूर्व प्रधान के खेत में धान की फसल पर शीशम का पेड़ गिर गया था। आरोप है कि पेड़ कटवाने के बाद मौके पर पहुंचे वन दरोगा ने जुर्माने के नाम पर उनसे 10 हजार रुपये लिए।

इसी तरह काजीपुर गांव के एक किसान के खेत में गिरे तीन गूलर के पेड़ों को हटाने के बदले सात हजार रुपये लिए जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मामलों से किसान परेशान और भयभीत हैं।

किसान यूनियन ने दी धरने की चेतावनी

किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रामशंकर सिंह ने कहा कि किसानों से कथित अवैध वसूली की शिकायत जिलाधिकारी से की जाएगी। कार्रवाई नहीं होने पर किसान यूनियन द्वारा धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।

वहीं क्षेत्रीय वन अधिकारी अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित वन दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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