बाढ़ के पानी में धरने पर बैठे किसान, आश्वासन के बाद सौंपा मांगपत्र


दो दिन में डीएम को रिपोर्ट भेजने का भरोसा, बाढ़ के बाद स्थायी समाधान का आश्वासन

सहायक ब्यूरो चीफ सुधीर सिंह कुम्भाणी, सीतापुर ✍️

सकरन, सीतापुर। बाढ़ और अतिवृष्टि की मार झेल रहे किसानों का आक्रोश बुधवार को कल्ली-लखनियापुर बाजार में सड़क पर देखने को मिला। जलभराव के बीच सैकड़ों किसान और ग्रामीण धरने पर बैठ गए। किसानों का कहना है कि समस्या केवल फसल बर्बादी तक सीमित नहीं है, बल्कि जलनिकासी और संपर्क मार्गों की बदहाली के कारण हर वर्ष ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।

धरने की सूचना पर तहसीलदार लहरपुर न्यायिक स्वाति सिंह और राजस्व निरीक्षक अमर सिंह वर्मा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से वार्ता कर उनकी समस्याएं सुनीं। किसानों ने फसल क्षति, राहत सामग्री, सड़क, जलनिकासी और बाढ़ से स्थायी सुरक्षा सहित छह सूत्रीय मांगपत्र अधिकारियों के समक्ष रखा।

दो दिन में डीएम को रिपोर्ट भेजने का आश्वासन

तहसीलदार ने तत्कालीन समस्याओं से संबंधित मांगों की रिपोर्ट दो दिवस के भीतर जिलाधिकारी सीतापुर को भेजने और आवश्यक कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया। वहीं, बाढ़ का पानी समाप्त होने के बाद स्थायी समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई।

मौके पर क्षेत्रीय लेखपाल अरविंद सिंह को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसानों ने अपना मांगपत्र सौंप दिया।

फसल क्षति से लेकर स्थायी जलनिकासी तक की मांग

किसानों ने प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने, फसल क्षति का निष्पक्ष राजस्व एवं कृषि विभाग से सर्वे कराने, मुआवजा और फसल बीमा का लाभ दिलाने की मांग की।

इसके अलावा लखनियापुर-चिल्हिया और लखनियापुर-खजुरा मार्गों को ऊंचा कराने तथा स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई। किसानों ने लालपुर बाजार से सांडा तक घाघरा नदी पर बांध निर्माण की मांग भी उठाई।

धरने में आजाद समाज पार्टी के मुलायम सिंह गौतम, संतराम जाटव, संजीत राजवंशी, भल्लू राम, शिवरानी, कमलेश, श्रवण कुमार और इसरार अहमद समेत बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीण मौजूद रहे।

अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की ओर से भेजी जाने वाली रिपोर्ट और बाढ़ के बाद प्रस्तावित स्थायी समाधान की कार्रवाई पर टिकी है।

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