ब्यूरो रिपोर्ट: सीमा मौर्या, उन्नाव ✍️
उन्नाव। सपने बड़े हों और हौसले बुलंद, तो छोटी उम्र में भी बड़ी सोच की मिसाल पेश की जा सकती है। उन्नाव के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, नवाबगंज की कक्षा 9 की छात्रा तन्वी तिवारी ने एक दिन की जिलाधिकारी बनकर सबका ध्यान आकर्षित किया। जिलाधिकारी की कुर्सी पर बैठकर उन्होंने करीब 15 से 20 फरियादियों की समस्याएं सुनीं और जनहित से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए।
स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर जताई चिंता
एक दिन की जिलाधिकारी तन्वी तिवारी ने जिले के कई विद्यालयों में खेल मैदान और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ स्कूलों में शौचालय उपलब्ध होने के बावजूद साफ-सफाई की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से विद्यालयों की व्यवस्थाओं में सुधार करने पर जोर दिया।
सड़कों की बदहाली और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
तन्वी ने जातिकपुर समेत जिले की अन्य सड़कों की खराब स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने सड़क निर्माण और मरम्मत से संबंधित टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनकी इस पहल में विकास कार्यों की गुणवत्ता और जवाबदेही जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए।
आवास की समस्या पर दिखाई संवेदनशीलता
जनसुनवाई के दौरान एक फरियादी ने अपना घर गिराए जाने और आवास की समस्या से संबंधित शिकायत रखी। इस पर तन्वी ने जिलाधिकारी से मामले को गंभीरता से देखने और पात्रता के आधार पर जरूरतमंद को आवास दिलाने में मदद करने का अनुरोध किया। कम उम्र में जनसमस्याओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता चर्चा का विषय बनी।
असली जिलाधिकारी बनने का सपना
जिलाधिकारी घनश्याम मीणा ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को प्रशासनिक व्यवस्था से परिचित कराना और उन्हें भविष्य में अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करना है।
वहीं, तन्वी तिवारी ने आगे पढ़ाई करके वास्तविक जिलाधिकारी बनने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने समाज और देश के लिए अच्छे कार्य करने की इच्छा भी जताई।
तन्वी की यह पहल बताती है कि बच्चों को जिम्मेदारी निभाने और जनसमस्याओं को समझने का अवसर मिले, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ सकता है। एक दिन की जिलाधिकारी बनकर तन्वी ने अपने सपने के साथ-साथ जनहित के मुद्दों को भी प्राथमिकता दी।
