ब्यूरो रिपोर्ट प्रमोद मिश्रा
बलरामपुर। एमएलके पीजी कॉलेज के एमएससी वनस्पति विज्ञान विभाग के छात्र-छात्राओं ने दक्षिण भारत के शैक्षिक भ्रमण के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण वनस्पतियों के नमूने एकत्रित कर महाविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में संरक्षित किए। विद्यार्थियों का शैक्षिक भ्रमण दल 20 से 31 अक्टूबर 2026 तक दक्षिण भारत के विभिन्न स्थानों के भ्रमण पर रहा। इस दौरान मदुरै, रामेश्वरम, कन्याकुमारी, कोवलम, मुन्नौर एवं तिरुवनंतपुरम सहित कई क्षेत्रों से वनस्पतियों के नमूने एकत्रित किए गए।
मंगलवार को विद्यार्थियों ने इन नमूनों को विभाग में संरक्षित किया। इस अवसर पर महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव संजीव कुमार वार्ष्णेय, प्राचार्य प्रो. जेपी पाण्डेय, विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन, डॉ. मोहम्मद अकमल एवं डॉ. वीर प्रताप सिंह ने एकत्रित वनस्पतियों का अवलोकन किया और उनके शैक्षणिक एवं शोध संबंधी महत्व पर प्रकाश डाला।
विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि शैक्षिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने दक्षिण भारत के विभिन्न भौगोलिक एवं पारिस्थितिक क्षेत्रों में पाई जाने वाली वनस्पतियों का अध्ययन किया। इस दौरान लाइकोपोडियम (Lycopodium), ग्लेइकेनिया (Gleichenia), सेलाजिनेला (Selaginella) तथा विभिन्न समुद्री शैवालों में सारगैसम (Sargassum), पैडिना (Padina), अल्वा (Ulva), फ्यूकस (Fucus) एवं कॉडलोपा (Caulerpa) के नमूने एकत्रित किए गए।
उन्होंने बताया कि संरक्षित किए गए ये नमूने बीएससी एवं एमएससी के विद्यार्थियों की प्रायोगिक और सैद्धांतिक कक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होंगे। इनके माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न पादप समूहों की संरचना, वर्गीकरण, विविधता एवं प्राकृतिक आवासों का प्रत्यक्ष अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। साथ ही विभाग का वनस्पति संग्रह समृद्ध होने के साथ भविष्य में शोध एवं अनुसंधान कार्यों को भी बढ़ावा मिलेगा।
महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव संजीव कुमार वार्ष्णेय ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुसंधान संबंधी अभिरुचि को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्राचार्य प्रो. जेपी पाण्डेय ने कहा कि शैक्षिक भ्रमण उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण अंग है। कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को प्राकृतिक परिवेश में प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने से विद्यार्थियों का ज्ञान अधिक व्यापक एवं स्थायी बनता है। ऐसे भ्रमण विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पर्यावरण के प्रति जागरूकता तथा शोध एवं अनुसंधान की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने सफल आयोजन और दुर्लभ वनस्पतियों के संग्रह एवं संरक्षण के लिए वनस्पति विज्ञान विभाग को बधाई दी।
शैक्षिक भ्रमण में शामिल छात्रा रिचा उपाध्याय ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि दक्षिण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में वनस्पतियों की विविधता को उनके प्राकृतिक आवास में देखना बेहद ज्ञानवर्धक रहा। विशेष रूप से समुद्री तटों एवं पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाने वाली वनस्पतियों के अध्ययन से पाठ्यक्रम में पढ़े गए विषयों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन के नेतृत्व में दूसरी बार शैक्षिक भ्रमण के दौरान दुर्लभ वनस्पतियों का संग्रह किया गया।
छात्रा इप्शिता ने कहा कि समुद्री शैवालों एवं दुर्लभ पादप प्रजातियों को करीब से देखने और उनके नमूने एकत्रित करने का अनुभव बेहद रोमांचक एवं उपयोगी रहा। वहीं छात्र मोहम्मद फैज ने कहा कि भ्रमण के दौरान पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक प्राकृतिक परिस्थितियों में वनस्पतियों का अध्ययन करने का अवसर मिला। नमूनों को एकत्रित करना, उनकी पहचान करना और सुरक्षित रखना उनके लिए महत्वपूर्ण व्यावहारिक अनुभव रहा, जो भविष्य में अध्ययन एवं शोध कार्यों में सहायक होगा।
शैक्षिक भ्रमण में रिचा उपाध्याय, इप्शिता, सौम्या सिंह, मोहम्मद फैज, सौम्य पांडेय, लक्ष्मी सोनी एवं शशि चौधरी सहित अन्य छात्र-छात्राएं शामिल रहे। विद्यार्थियों ने विभिन्न स्थानों पर उत्साह और परिश्रम के साथ वनस्पतियों के नमूने एकत्रित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापक डॉ. शिव महेंद्र सिंह, डॉ. श्रवण कुमार, राहुल कुमार एवं अर्शिया खातून मौजूद रहे।
