साठा धान की खेती से बचें, लाभकारी वैकल्पिक फसलें अपनाएं – जिलाधिकारी की किसानों से अपील

योगेंद्र सिंह यादव, ब्यूरो चीफ, शाहजहांपुर

शाहजहांपुर, 17 अप्रैल 2025।
जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने जनपद के समस्त किसान भाइयों से साठा धान की खेती से बचने की अपील की है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि साठा धान के स्थान पर ऐसी फसलों की बुवाई करें जो कम पानी में अधिक लाभ दे सकें। इनमें मक्का, मूंग, उड़द, सूरजमुखी, मूंगफली, हरा चारा, कपास, जूट, ज्वार, रेप्सीड, खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, लोबिया, पत्तेदार सब्जियां, खीरा, टिंडा, तोरई, भिंडी और अरबी जैसी फसलें प्रमुख रूप से शामिल हैं।

जिलाधिकारी ने बताया कि ये फसलें रबी और खरीफ सीजन के बीच के "अंतराल" को भरने में सहायक होती हैं और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती हैं। उन्होंने कहा कि यह वैकल्पिक फसलें न केवल कम लागत में तैयार होती हैं, बल्कि भूजल संरक्षण में भी सहायक सिद्ध होती हैं।

साठा धान के दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यह फसल अन्य धान की किस्मों की तुलना में अधिक पानी की मांग करती है, जिससे भूजल स्तर में गिरावट आती है और भूमि के बंजर होने का खतरा बढ़ जाता है। विकसित और जागरूक कृषक साठा धान को नदियों और जलाशयों का दुश्मन मानते हैं, क्योंकि यह जल स्रोतों पर अनावश्यक दबाव डालती है।

जिलाधिकारी ने सभी कृषकों से अनुरोध किया है कि वे पर्यावरण-संवेदनशील और आर्थिक रूप से लाभदायक फसलों की ओर अग्रसर हों, जिससे खेती भी फले-फूले और जलवायु पर सकारात्मक असर पड़े।

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