ब्यूरो रिपोर्ट जहीन खान ✍️
टोंडरपुर, हरदोई।
विकासखंड टोंडरपुर क्षेत्र के सुर्जीपुर गांव में स्थित खाद गोदाम की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है, जो अब खंडहर का रूप ले चुकी है। वर्षों से इस गोदाम में ना तो कोई सफाई हुई है और ना ही मरम्मत या रंगाई-पुताई का कोई कार्य किया गया है। चारों ओर बड़ी-बड़ी झाड़ियाँ और विषैले जीव-जंतु खतरे को और बढ़ा रहे हैं।
गोदाम की भीतर की दीवारें व छतें पूरी तरह से टूटी-फूटी हैं, फिर भी इसमें खाद का स्टॉक रखा जाता है। बरसात के मौसम में छत से लगातार पानी टपकता रहता है, जिससे स्टॉक भी खराब होने की संभावना बनी रहती है। इससे सबसे ज्यादा खतरा दूर-दराज से आए किसानों और कर्मचारियों को है, जिन्हें मजबूरी में जान जोखिम में डालकर इस गोदाम तक पहुंचना पड़ता है।
किसानों ने बताया कि यह गोदाम वर्षों से खस्ता हालत में है और कभी भी गिर सकता है, लेकिन अब तक किसी भी उच्च अधिकारी ने इसकी सुध नहीं ली। किसानों का कहना है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।
यहां तैनात सचिव हरिओम शुक्ला ने बताया कि,
“हमारे पास तीन समितियां हैं, जिनमें सुर्जीपुर समिति की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।”
अब सवाल यह उठता है कि जब स्थानीय प्रशासन को शिकायतें मिल चुकी हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या प्रशासन किसानों की सुरक्षा और सुविधा के प्रति सच में गंभीर है?
इस जर्जर गोदाम की स्थिति को देखकर यही लगता है कि यहाँ के किसान भगवान भरोसे हैं।
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