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ठेकेदार–बिजली विभाग की मिलीभगत से उखाड़ा गया बिजली का पोल, 5 घर अंधेरे में डूबे**

 


🖊️ ब्यूरो रिपोर्ट : शशांक मिश्रा

**अंडरपास निर्माण में घोर लापरवाही

लखनऊ।

राजधानी लखनऊ में विकास कार्यों की आड़ में लापरवाही और मनमानी का एक और गंभीर मामला सामने आया है। कृष्णानगर थाना क्षेत्र अंतर्गत फाटक संख्या–05 के पास स्थित रामदास खेड़ा गांव में रविवार देर रात करीब 11 बजे अंडरपास निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदारों और बिजली विभाग के कर्मियों की कथित मिलीभगत से बिजली का पोल उखाड़कर तालाब के किनारे फेंक दिया गया।

इस बिजली पोल से गांव के कम से कम पांच घरों के विद्युत कनेक्शन जुड़े हुए थे, जिसके हटते ही पांचों घरों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। अचानक बिजली गुल होने से पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया और ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

बिना सूचना, बिना वैकल्पिक व्यवस्था

ग्रामीणों का आरोप है कि न तो बिजली विभाग द्वारा कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही वैकल्पिक विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था की गई। रात के समय बिजली गुल होने से

बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

वहीं उखड़े पोल और खुले तारों से बड़े हादसे की आशंका भी बनी रही।

विकास कार्य या अव्यवस्था?

स्थानीय लोगों का कहना है कि अंडरपास निर्माण कार्य के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर कार्य किया जा रहा है। सवाल उठता है कि

क्या ठेकेदारों को बिजली के पोल उखाड़ने का अधिकार है?

और बिजली विभाग आखिर किस दबाव में मौन साधे हुए है?

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते कोई हादसा हो जाता, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?

ग्रामीणों में रोष, कार्रवाई की मांग

घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि

तत्काल नया बिजली पोल लगाकर आपूर्ति बहाल की जाए

दोषी ठेकेदार और बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए

भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए सख्त निर्देश जारी किए जाएं

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि विकास कार्यों की निगरानी के अभाव में आम जनता को ही सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है, और जिम्मेदार अधिकारी हादसे के इंतजार में आंखें मूंदे बैठे रहते हैं।

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