सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहित करने और मजबूत उद्यमिता माहौल विकसित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, स्टार्टअप और डाटा सेंटर नीतियों में समय-समय पर संशोधन कर उन्हें अधिक व्यावहारिक और निवेशकों के अनुकूल बनाया गया है।
प्रदेश सरकार ने उ०प्र० इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति-2020, उ०प्र० स्टार्टअप नीति-2020, डाटा सेंटर नीति-2021 की समीक्षा के बाद नई सूचना प्रौद्योगिकी एवं आईटीईएस नीति-2022 अधिसूचित की है। इन सभी नीतियों में पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्रों के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। साथ ही महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगजन और ट्रांसजेंडर वर्ग के हितों को भी प्राथमिकता दी गई है।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स क्षेत्र में वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए प्रदेश सरकार ने उ०प्र० सेमीकंडक्टर नीति-2024 और इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण नीति-2025 लागू की है। इसके साथ ही नई स्टार्टअप नीति, नई डाटा सेंटर नीति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नीति निर्माणाधीन है, जिन्हें शीघ्र लागू किए जाने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश की स्टार्टअप नीति-2020 के तहत 10,000 स्टार्टअप्स और 100 इन्क्यूबेटर्स का लक्ष्य रखा गया था। बदलते परिदृश्य को देखते हुए वर्ष 2022 में इसका प्रथम संशोधन किया गया, जिससे नवाचार और उद्यमिता को और मजबूती मिली। प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मेडिटेक, ड्रोन, 5जी/6जी, ब्लॉकचेन और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में 7 उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना को मंजूरी दी गई है।
डीपीआईआईटी, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत 18,500 से अधिक स्टार्टअप्स के साथ उत्तर प्रदेश का स्टार्टअप ईकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है। इनमें से 2,850 से अधिक स्टार्टअप ‘स्टार्ट-इन-यूपी’ में पंजीकृत हैं। उल्लेखनीय रूप से, 9,000 से अधिक स्टार्टअप महिलाओं के नेतृत्व में संचालित हो रहे हैं। वहीं, प्रदेश के 48 स्टार्टअप्स को सिडबी द्वारा वित्त पोषण प्राप्त हुआ है।
प्रदेश में वर्तमान में 76 मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर्स कार्यरत हैं, जो आईटी, फिनटेक, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सामाजिक प्रभाव जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान कर रहे हैं। स्टार्टअप नीति के अंतर्गत अब तक करोड़ों रुपये की वित्तीय सहायता स्टार्टअप्स और इन्क्यूबेटर्स को प्रदान की जा चुकी है।
प्रदेश सरकार के ठोस प्रयासों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज देश का चौथा सबसे बड़ा स्टार्टअप ईकोसिस्टम बन चुका है और डीपीआईआईटी की स्टार्टअप रैंकिंग में “लीडर्स” श्रेणी में स्थान प्राप्त कर चुका है।
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