शाहजहांपुर।
भारतीय संगीत की सघन परंपरा, उसकी साधना और शास्त्रीय गरिमा को शब्दबद्ध करती एक महत्वपूर्ण कृति का विमोचन आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक गरिमा के वातावरण में सम्पन्न हुआ। डा. कविता भटनागर एवं डा. श्रीकांत मिश्रा द्वारा संपादित भारतीय संगीत पर आधारित पुस्तक “वाङ्मय” का विमोचन मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती द्वारा किया गया।
इस अवसर पर स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि भारतीय संगीत केवल स्वर और ताल का संयोजन नहीं है, बल्कि यह आत्मा की अनुभूति और ब्रह्म से संवाद का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि “वाङ्मय” जैसी कृतियाँ भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं।
एस.एस. कॉलेज के सचिव डा. अवनीश मिश्रा ने पुस्तक को भारतीय संगीत साहित्य की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह कृति शोधार्थियों, साधकों और संगीत-रसिकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।
पुस्तक की सह-संपादक डा. कविता भटनागर ने कहा कि साहित्य, कला और संगीत के बिना किसी समाज की परिकल्पना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि “वाङ्मय” में नाद-ब्रह्म की अवधारणा, रागों की दार्शनिकता, संगीत की साधना-परंपरा तथा उसके सांस्कृतिक प्रभावों को साहित्यिक सौंदर्य के साथ प्रस्तुत किया गया है।
वहीं सह-संपादक डा. श्रीकांत मिश्रा ने कहा कि यह पुस्तक विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा साहित्य, कला और संगीत के रसिकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
विमोचन कार्यक्रम में डा. आलोक कुमार सिंह, सुयश सिन्हा, ममता सिंह सहित अनेक शिक्षकगण एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शैक्षिक एवं सांस्कृतिक संवाद का सार्थक वातावरण देखने को मिला।
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