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विश्व आर्द्रभूमि दिवस एवं बर्ड फेस्टिवल का भव्य आयोजन फकरगंज वेटलैंड पर पक्षी संरक्षण और जैव विविधता का संदेश


स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव ✍🏻 

शाहजहाँपुर।
जनपद शाहजहाँपुर में वन विभाग द्वारा फकरगंज स्थित वेटलैंड पर विश्व आर्द्रभूमि दिवस एवं बर्ड फेस्टिवल का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभागीय वनाधिकारी सचिन कुमार ने की। इस अवसर पर आर्द्रभूमि और पक्षियों के संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विविध गतिविधियाँ आयोजित की गईं।

कार्यक्रम के अंतर्गत युवाओं द्वारा रैली निकाली गई, जिसमें आर्द्रभूमि एवं पक्षी संरक्षण से जुड़े नारों से वातावरण गूंज उठा। उप प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. सुशील कुमार के निर्देशन में प्रतिभागियों ने सारस, बगुला, नीलकंठ, डोंगो, बबलर, किंगफिशर, पॉन्ड हेरोन सहित विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों का अवलोकन किया और उनके बारे में जानकारी प्राप्त की।

प्रभागीय वनाधिकारी सचिन कुमार ने आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई रामसर संधि की जानकारी देते हुए जैव विविधता को खाद्य श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने वर्ष 2026 की थीम “आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव” पर प्रकाश डालते हुए वरिष्ठ ग्रामवासियों से पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में आगे आने की अपील की।

उप प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. सुशील कुमार ने आर्द्रभूमि को “पर्यावरण का गुर्दा” बताते हुए उसके महत्व पर विस्तार से चर्चा की। क्षेत्रीय वनाधिकारी शत्रुध्न प्रसाद ने जैव विविधता पर व्याख्यान देते हुए तालाबों और पक्षियों के संरक्षण पर जोर दिया। पक्षियों पर शोध कर रही निधि शर्मा ने विभिन्न पक्षियों की विशेषताओं, उपयोगिता और पर्यावरण में उनकी आवश्यकता के बारे में जानकारी साझा की।


कार्यक्रम के दौरान क्विज और लूडो प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें राज कमल, नंदिनी, कौशल, मोहन, अमन और शिवा विजेता रहे। चित्रकला प्रतियोगिता में नंदिनी ने प्रथम, सुधा ने द्वितीय तथा आकांक्षा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सभी विजेताओं को मंच से पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे जिला परियोजना अधिकारी, जिला गंगा समिति डॉ. विनय कुमार सक्सेना ने उपस्थित सभी लोगों को आर्द्रभूमि एवं पक्षी संरक्षण की शपथ दिलाई। आयोजन में वन विभाग, प्राथमिक विद्यालय फकरगंज, जिला गंगा समिति तथा स्थानीय ग्रामवासियों का विशेष सहयोग रहा।

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