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सरकारी किताबों का काला खेल: बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, कबाड़ में बिक गई शिक्षा

 

ब्यूरो चीफ शास्त्र तिवारी, बहराइच ✍️

बहराइच। जिले में शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निशुल्क वितरित की जाने वाली किताबें कबाड़ में बेच दी गईं। इस पूरे प्रकरण ने न सिर्फ सर्व शिक्षा अभियान पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि शिक्षा माफियाओं के बढ़ते हौसलों को भी उजागर कर दिया है।

मिली जानकारी के अनुसार, थाना रामगांव क्षेत्र के मेटकहा मोड़ के पास एक कबाड़ी की दुकान पर भारी मात्रा में सरकारी किताबों का जखीरा बरामद हुआ। ये वही किताबें हैं जो आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को मुफ्त में वितरित की जानी थीं। हैरानी की बात यह है कि इन किताबों की खुलेआम खरीद-फरोख्त होती रही और किसी जिम्मेदार अधिकारी को इसकी भनक तक नहीं लगी।

सूत्रों के मुताबिक, करीब 50 लाख रुपये मूल्य की सरकारी किताबों को महज 4 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेच दिया गया। कबाड़ी द्वारा लगभग 26 हजार रुपये में इस बड़ी खेप को खरीदने का खुलासा हुआ है। इतना ही नहीं, वाहन संख्या UP21FT 8485 के जरिए इन किताबों को जिले के बाहर भी भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

यह घटना सीधे तौर पर हजारों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जो इन किताबों के जरिए अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाते। शिक्षा के मंदिर की इस लूट पर यह पंक्ति सटीक बैठती है—
“सरस्वती की रद्दी से, कबाड़ी का घर भर गया,
बच्चों के हाथों से ज्ञान का दीपक उतर गया।”

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब यह सूचना जिलाधिकारी बहराइच तक पहुंची, तो उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच समिति गठित कर दी है। फिलहाल जांच जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा।

यह घटना प्रशासन और शिक्षा विभाग के लिए एक बड़ा सवाल है—क्या बच्चों के भविष्य की सुरक्षा अब भी प्राथमिकता है, या फिर शिक्षा माफियाओं के आगे सिस्टम पूरी तरह नतमस्तक हो चुका है?

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