राम-सीता विवाह प्रसंग पर भावविभोर हुए श्रद्धालु, विदाई सुन छलके आंसू

 

स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश ✍️

जनपद शाहजहाँपुर स्थित मुमुक्षु आश्रम में आयोजित श्रीराम कथा के समापन दिवस पर कथा व्यास विजय कौशल जी महाराज ने प्रभु श्रीराम के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। माता सीता की विदाई का मार्मिक प्रसंग सुनकर कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

कथा के दौरान उन्होंने धनुष भंग प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि जब भगवान श्रीराम ने शिव धनुष तोड़ा तो स्वयंवर में उपस्थित राजाओं में हाहाकार मच गया। तपस्या में लीन परशुराम को जब यह समाचार मिला तो वे क्रोध में सभा में पहुंचे। भगवान राम और लक्ष्मण ने उन्हें प्रणाम किया। लक्ष्मण के विनोदी कटाक्ष और श्रीराम की विनम्रता से अंततः परशुराम का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने भगवान राम के अवतार स्वरूप को पहचान कर दंडवत प्रणाम किया।

इसके उपरांत राम-सीता विवाह और जनकपुरी की भव्यता का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि अवध नरेश राजा दशरथ बारात लेकर जनकपुरी पहुंचे, जहां राजा जनक ने भव्य स्वागत किया। “आज मिथिला नगरिया निहाल सखिया, चारो दूलहा में बड़का कमाल सखिया” जैसे पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति से पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया।

कन्यादान और विदाई प्रसंग के दौरान “सिया रघुवर जी के संग पड़न लागीं भांवरिया” की संगीतमयी प्रस्तुति से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। विवाह उपरांत कोहवर और जेवनार की पारंपरिक रस्मों का भी सुंदर वर्णन किया गया। माता सीता की विदाई के समय जनक और माता सुनयना की करुण भावनाओं का चित्रण सुन उपस्थित जनसमूह की आंखें नम हो गईं।

मंच पर मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती सहित अनेक संत महात्मा उपस्थित रहे। कथा प्रारंभ से पूर्व व्यासपीठ का पूजन मुख्य यजमानों द्वारा किया गया तथा विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों ने आरती उतारी।

समापन अवसर पर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि वर्ष 1964 में पूज्य संत शुकदेवानंद जी महाराज द्वारा रोपा गया छोटा सा बीज आज एक विशाल फलदार वृक्ष बन चुका है। उन्होंने कहा कि श्रीराम का चरित्र भारतीय संस्कृति की आत्मा है और यह पावन परंपरा निरंतर चलती रहेगी।

कथा श्रवण के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

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