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एआई साथी मिशन से वरिष्ठ नागरिक होंगे डिजिटल रूप से सशक्त: डॉ. राजेश्वर सिंह

 


ब्यूरो रिपोर्ट: शशांक मिश्रा

लखनऊ, 22 मार्च 2026। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर “एआई साथी – वरिष्ठ नागरिक डिजिटल सशक्तिकरण मिशन” शुरू करने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) युग में सुरक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने प्रस्ताव में कहा कि प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस के विस्तार के साथ पेंशन, डीबीटी, राशन, स्वास्थ्य सेवाएं और वित्तीय लेन-देन जैसे अधिकांश कार्य अब ऑनलाइन माध्यम से संचालित हो रहे हैं। हालांकि, इसके चलते वरिष्ठ नागरिकों के डिजिटल प्रणाली से वंचित रह जाने की चुनौती भी तेजी से बढ़ रही है।

उन्होंने बताया कि देश में साइबर अपराधों में तेजी से वृद्धि हुई है, जिनमें लगभग 75 प्रतिशत मामले वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े हैं। वरिष्ठ नागरिक इस तरह के अपराधों के सबसे संवेदनशील वर्ग के रूप में उभर रहे हैं। अनुमान के अनुसार, आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश में 4 से 5 करोड़ वरिष्ठ नागरिक डिजिटल सेवाओं पर निर्भर होंगे।

इसी परिप्रेक्ष्य में प्रस्तावित “एआई साथी मिशन” वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित (Safe), स्मार्ट (Smart) और एआई सक्षम (AI-enabled) बनाने पर केंद्रित है। इस मिशन के तहत हाइब्रिड प्रशिक्षण मॉडल अपनाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें बैंक, जनसुविधा केंद्र और राशन केंद्रों पर अल्पकालिक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे, साथ ही ग्राम और शहरी स्तर पर संरचित प्रशिक्षण सत्र आयोजित होंगे।

प्रशिक्षण में साइबर सुरक्षा, डिजिटल सेवाओं का उपयोग और एआई आधारित सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। “यूज़-बेस्ड लर्निंग” पद्धति के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को व्यावहारिक अभ्यास भी कराया जाएगा, जिससे वे डिजिटल प्लेटफॉर्म का आत्मविश्वास के साथ उपयोग कर सकें।

डॉ. सिंह ने सुझाव दिया कि जनसुविधा केंद्र, बैंक मित्र, पंचायत कर्मचारी और पुलिस बीट स्टाफ जैसे स्थानीय संसाधनों को इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल किया जाए, ताकि सूचना का प्रभावी प्रसार हो सके।

इसके अलावा, उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और आर्थिक सहायता, जैसे पेंशन आदि में वृद्धि करने का भी आग्रह किया है। साथ ही संबंधित विभागों को एक व्यवहारिक और स्थायी कार्यान्वयन मॉडल तैयार करने के निर्देश देने की बात कही है।

उन्होंने इस मिशन की शुरुआत लखनऊ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में करने, राज्य स्तरीय टास्क फोर्स के गठन तथा 12 से 18 महीनों के भीतर इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू करने का सुझाव दिया है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि “वरिष्ठ नागरिकों को केवल डिजिटल धोखाधड़ी से बचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें डिजिटल और एआई युग का सक्रिय भागीदार बनाना आवश्यक है। तभी समावेशी विकास का लक्ष्य प्राप्त किया जा 

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