Breaking News

शाहजहाँपुर: पराली जलाई तो खैर नहीं! जिलाधिकारी ने जारी किए सख्त निर्देश; भारी जुर्माने के साथ हो सकती है जेल


[ पर्यावरण संरक्षण / विशेष प्रेस विज्ञप्ति ]

स्टेट ब्यूरो हेड: योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश ✍️

शाहजहाँपुर | 26 अप्रैल, 2026 सच की आवाज वेब न्यूज - विशेष अपडेट

शाहजहाँपुर जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने फसलों के अवशेष जलाने से उत्पन्न हो रहे वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए जनपद के किसानों और कम्बाइन स्वामियों के लिए बेहद सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाना न केवल मृदा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह एक दंडनीय अपराध भी है।

जुर्माने एवं दंड का प्रावधान:
  • 2 एकड़ से कम खेत: ₹5,000 प्रति घटना।
  • 2 से 5 एकड़ खेत: ₹10,000 प्रति घटना।
  • 5 एकड़ से अधिक खेत: ₹30,000 प्रति घटना।
  • कानूनी कार्यवाही: एनजीटी एक्ट की धाराओं के तहत क्षतिपूर्ति की वसूली और कारावास भी संभव।

कम्बाइन स्वामियों की जिम्मेदारी: जिलाधिकारी ने निर्देशित किया है कि कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर एस.एम.एस. (SMS) या अन्य अवशेष प्रबंधन यंत्रों जैसे स्ट्रारीपर, मल्चर या रोटरी स्लेशर का प्रयोग अनिवार्य है। बिना प्रबंधन यंत्रों के कटाई करने वाले कम्बाइन संचालकों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

पराली प्रबंधन के विकल्प:
कृषक पराली को गौशालाओं को दान कर सकते हैं या मिट्टी में मिलाकर कम्पोस्ट बना सकते हैं। इसके अलावा बेलर के माध्यम से पराली को हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, बदायूँ को उपलब्ध कराने की सुविधा भी दी गई है। सीधे बुवाई करने वाले किसानों को पराली न जलाने का शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा।

"सच की आवाज वेब न्यूज" जनपद के समस्त किसानों से अपील करता है कि वे वातावरण को प्रदूषण मुक्त रखने और खेत की उर्वरा शक्ति बचाने के लिए जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

"मिट्टी बचाएं, प्रदूषण घटाएं - सच की आवाज वेब न्यूज"

Post a Comment

0 Comments