शाहजहाँपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में उत्तर प्रदेश सरकार की 108 एवं 102 एंबुलेंस सेवा के इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियनों (EMT) के लिए एक विशेष जीवनरक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस महा-प्रशिक्षण शिविर में शाहजहाँपुर के अलावा लखीमपुर खीरी और हरदोई जनपदों के एंबुलेंस कर्मियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्री-हॉस्पिटल इमरजेंसी केयर (अस्पताल पहुंचने से पहले मिलने वाला इलाज) को और अधिक प्रभावी, आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण बनाना है ताकि दुर्घटनाओं के शिकार मरीजों को तत्काल 'गोल्डन ऑवर' में नया जीवन दिया जा सके।
📌 इन गंभीर परिस्थितियों के लिए दिया गया लाइव डेमोंस्ट्रेशन:
- 🔹 रोड एक्सीडेंट मैनेजमेंट: सड़क हादसों के दौरान होने वाली हेड इंजरी (सिर की चोट), चेस्ट इंजरी (सीने की चोट) और एब्डोमिनल इंजरी (पेट की चोट)।
- 🔹 ब्लीडिंग कंट्रोल: दुर्घटना के तुरंत बाद अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने के आधुनिक वैज्ञानिक तरीके।
- 🔹 हेलमेट रिमूवल तकनीक: सिर की चोट वाले मरीजों का बिना गर्दन हिलाए सुरक्षित तरीके से हेलमेट निकालने की लाइव ट्रेनिंग।
- 🔹 संसाधन प्रबंधन: आपातकालीन जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और लाइफ सपोर्ट उपकरणों की देखरेख।
"प्रशिक्षण सत्र के दौरान ईएमटी को वीडियो और लाइव मॉडल्स के जरिए व्यावहारिक रूप से प्रशिक्षित किया गया है। किसी भी गंभीर हादसे में मरीज की जान बचाने के लिए एंबुलेंस कर्मियों द्वारा ऑन द स्पॉट लिया गया सही निर्णय और बेहतर प्री-हॉस्पिटल केयर सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होती है।"
कार्यक्रम में विशेष रूप से पहुंचे क्वालिटी ऑडिटर पुनीत सिंह ने सभी तकनीशियनों को निर्देशित किया कि एंबुलेंस के भीतर रखे लाइफ सपोर्ट उपकरण हर समय चालू हालत में होने चाहिए। उन्होंने आवश्यक दवाओं के सही उपयोग और तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया। इसके उपरांत, उपस्थित एंबुलेंस सेवा के अधिकारियों ने एंबुलेंस कर्मियों को पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
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