[ विशेष कवरेज: शिक्षा और आध्यात्म | शाहजहाँपुर ]
ब्यूरो रिपोर्ट: योगेंद्र सिंह यादव (स्टेट ब्यूरो हेड), उत्तर प्रदेश ✍️
शाहजहाँपुर स्थित श्री रामचन्द्र मिशन आश्रम में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के तत्वावधान में आयोजित **‘परीक्षा पर्व’** कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जीवन और शिक्षा के बीच संतुलन बनाने का अद्भुत मंत्र मिला। हार्टफुलनेस मेडिटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक **पूज्य कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’** ने बच्चों के साथ संवादात्मक सत्र में परीक्षा को अंक प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्म-विकास का उत्सव बताया।
दाजी के प्रेरक विचार:
• तनाव प्रबंधन: तनाव स्वाभाविक है, पर इसे हावी न होने दें। शांत मन से ही ज्ञान का वास्तविक अवगाहन संभव है।
• अंकों का दबाव: जीवन को अंकों की संकीर्ण परिधि में न बांधें। प्रयास की श्रेष्ठता ही वास्तविक उपलब्धि है।
• सफलता का सूत्र: सकारात्मक चिंतन, संतुलित दिनचर्या और ध्यान ही आत्मविश्वास के मुख्य आधार हैं।
विद्यार्थियों की जिज्ञासा का समाधान: सत्र के दौरान रायन इंटरनेशनल स्कूल की कौतुकी और उच्च प्राथमिक विद्यालय चौढ़ेरा के छात्र पवन व सुनैना ने परीक्षा संबंधी जटिल प्रश्न पूछे। दाजी ने अत्यंत सहज और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से उत्तर देते हुए बच्चों को आत्मिक जागरूकता और मानसिक संतुलन बनाए रखने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने रेखांकित किया कि मानव जीवन स्वयं एक सतत परीक्षा है, जो हमें परिपक्व बनाती है।
"सच की आवाज वेब न्यूज़" विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और उनके मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समर्पित ऐसी पहलों की सराहना करता है।
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