लखनऊ। राजधानी को 'स्मार्ट और सुरक्षित नगर' बनाने के विधिक और प्रशासनिक दावों के बीच कलेक्ट्रेट व नगर निगम के प्रवर्तन प्रभाग की एक बेहद खतरनाक धरातलीय लापरवाही पटल पर आई है। लखनऊ के पश्चिमी जोन अंतर्गत व्यस्ततम मुख्य मार्गों में शुमार मोहन रोड के काकोरी मोड़ अंचल में पिछले दो दिनों से सड़क किनारे लोहे के भारी-भरकम साइनबोर्ड/रोड का ढांचा विसंगतिपूर्ण तरीके से गिरा पड़ा है। इस मलबे के कारण व्यस्त सड़क की चौड़ाई आंशिक रूप से बाधित हो गई है, जिससे यहाँ कभी भी कोई जघन्य सड़क दुर्घटना घटित हो सकती है। जिम्मेदार नागरिक अधिकारियों द्वारा समय रहते इस अवरोध को न हटाए जाने से स्थानीय नागरिकों और राहगीरों में गहरा रोष व्याप्त है।
काकोरी मोड़ बाईपास oars मोहन रोड बेल्ट कलेक्ट्रेट यातायात कमान के अनुसार एक अत्यंत संवेदनशील और हाई-ट्रैफिक ज़ोन है, जहाँ से २४ घंटे में हजारों दुपहिया, चारपहिया और व्यावसायिक वाहन गुजरते हैं। सड़क किनारे गिरे इस नुकीले और भारी लोहे के एंगल के कारण विशेष रूप से रात्रिकालीन गश्त (Night Patrol) और घने कोहरे/अंधेरे के समय वाहन चालकों को यह अवरोध दिखाई नहीं देता। यदि कोई तेज रफ्तार बाइक या कार इससे टकराती है, तो जानमाल का भारी विधिक नुकसान होना निश्चित है। जिम्मेदार इंजीनियरिंग विंग अब तक आंखें बंद किए बैठी है।
| 📍 भौतिक अवस्थिति (Location Profile) | ⚖️ संभावित विधिक विसंगति एवं नागरिक मांग |
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• मुख्य हॉटस्पॉट: काकोरी मोड़, मोहन रोड, कलेक्ट्रेट ज़ोन, लखनऊ। • अवरोध का प्रकार: नगर निगम या विज्ञापन एजेंसी का गिरा हुआ भारी लोहे का बोर्ड/रोड ढांचा। • लंबित समयावधि: पिछले ४८ घंटों से पटल पर जस का तस उपेक्षित। |
• उत्तरदायित्व का अभाव: दुर्घटना होने पर मोटर व्हीकल एक्ट व बीएनएस के तहत आपराधिक उपेक्षा का मामला। • त्वरित निस्तारण मांग: कलेक्ट्रेट लोक शिकायत अनुभाग के हस्तक्षेप से तत्काल क्रेन बुलाकर ढांचा सीज करने की मांग। • सुरक्षा बैरिकेडिंग: ढांचा हटने तक मौके पर रिफ्लेक्टर या सुरक्षा शंकु (Cones) लगाने की विधिक आवश्यकता। |
स्थानीय दुकानदारों, राहगीरों और कलेक्ट्रेट जनसुनवाई मंचों ने सीधे तौर पर नगर आयुक्त और क्षेत्रीय जोनल अधिकारी की कार्यप्रणाली पर तीखे विधिक सवाल दागे हैं। नागरिकों का कहना है कि कर (Tax) वसूलने के लिए कड़े विधिक नोटिस जारी करने वाला प्रशासनिक अमला जनता की सुरक्षा से जुड़ी इस गंभीर विसंगति को लेकर इतना उदासीन क्यों है? क्या विभाग किसी बड़ी अप्रिय घटना या मासूम की मौत का इंतजार कर रहा है? कलेक्ट्रेट के आईजीआरएस (IGRS) सेल पर भी इस अवरोध की रीयल-टाइम प्रविष्टि दर्ज कराई गई है।
"सड़कों के किनारे अनधिकृत या जर्जर हो चुके होर्डिंग्स और लोहे के ढांचे राहगीरों के विधिक जीवन के अधिकार का सीधा हनन हैं। काकोरी मोड़ जैसी व्यस्ततम विंग पर दो दिनों तक लोहे के एंगल का पड़ा रहना प्रशासनिक सर्विलांस की शून्यता को दर्शाता है। यदि समय रहते क्रेन कमान द्वारा इसे पटल से ज़ब्त कर नहीं हटाया गया और इसके कारण कोई विसंगतिपूर्ण सड़क दुर्घटना घटित हुई, तो संबंधित जोन के कनिष्ठ अभियंता (JE) और विज्ञापन प्रभारी के विरुद्ध विधिक लापरवाही की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर दंडात्मक विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।" — नागरिक लोकहित विज़न नोट
काकोरी कस्बा, हरदोई रोड बाईपास, बुद्धेश्वर अंचल और पश्चिमी लखनऊ के सम्मानित प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय व्यापार मंडलों ने शासन से पुरजोर मांग की है कि इस खतरनाक रोड/बोर्ड के ढांचे को कलेक्ट्रेट आपदा कमान की तर्ज पर तत्काल प्रभाव से हटवाया जाए। 'सच की आवाज वेब न्यूज' के माध्यम से कलेक्ट्रेट कमान, माननीय जिलाधिकारी और नगर आयुक्त का ध्यान इस गंभीर विसंगति की ओर आकर्षित किया जा रहा है। हमारी समस्त जागरूक जनता से विधिक अपील है कि जब तक यह ढांचा पटल से विधिक रूप से विस्थापित नहीं हो जाता, तब तक काकोरी मोड़ से गुजरते समय अपने वाहनों की गति अत्यंत नियंत्रित रखें, रात्रि में हाई-बीम लाइट का सावधानीपूर्वक समावेशन करें तथा किसी भी अन्य नागरिक अवरोध की सूचना तत्काल नोडल टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों पर दर्ज कराएं।
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