**उन्नाव।** जनपद उन्नाव के गंजमुरादाबाद स्थित अशोक महाविद्यालय एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। महाविद्यालय के खिलाफ छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजा गया है। इस पत्र में शिक्षा व्यवस्था को तार-तार करने, सामूहिक नकल कराने, गरीब छात्रों के आर्थिक शोषण तथा निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक धन वसूली जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि महाविद्यालय में वर्षों से परीक्षा केंद्रों पर खुलेआम सामूहिक नकल कराई जा रही है। इतना ही नहीं, शिक्षकों द्वारा कथित रूप से परीक्षा कक्षों में बोलकर उत्तर तक बताए जाते हैं, जिससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कॉलेज में नियमित शिक्षण कार्य लगभग ठप है और कई कक्षाओं में छात्रों को पढ़ाने के बजाय केवल कागजों पर ही शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
शिकायत पत्र में तीखा प्रहार करते हुए कहा गया है कि महाविद्यालय अब शिक्षा का मंदिर कम और निजी लाभ का केंद्र अधिक बन चुका है। आरोप है कि बीए, बीएससी, एमए, एमएससी और बीटीसी जैसी कक्षाओं में नियमित पढ़ाई नहीं होती, जबकि छात्रों से विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक राशि वसूली जाती है। तय फीस न देने पर छात्रों को परीक्षा के समय प्रताड़ित करने और मानसिक दबाव बनाने के आरोप भी सामने आए हैं।
⚖️ विरोध करने पर मुकदमों में फंसाने का आरोप व औचक निरीक्षण की मांग:
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब भी कोई अभिभावक या छात्र इस अव्यवस्था और नकल का विरोध करता है, तो प्रबंधन द्वारा उन पर दबाव बनाने और विवादित मुकदमों में फंसाने का प्रयास किया जाता है। इन गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए शिकायतकर्ता ने कुलपति से मांग की है कि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित कर कॉलेज का औचक निरीक्षण कराया जाए, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब सभी की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन के रुख पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या उच्च शिक्षा की साख से जुड़े इन संगीन आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या फिर शिकायतों का यह पुलिंदा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। यदि इन आरोपों में सत्यता पाई जाती है, तो यह मामला केवल एक महाविद्यालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर देगा।
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