स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️
शाहजहाँपुर, 18 अगस्त। विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के संबंध में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों-कर्मचारियों को संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय पंच सम्मेलन का आयोजन विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी उत्कर्ष द्विवेदी, जिला विकास अधिकारी ऋषि पाल सिंह, परियोजना निदेशक अवधेश राम, उपायुक्त (श्रम रोजगार) यशोवर्धन सिंह सहित विभिन्न विकासखंडों के ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, खंड विकास अधिकारी एवं अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन एवं योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी जिला ग्राम्य विकास प्रशिक्षण संस्थान, तिलहर द्वारा दी गई। सम्मेलन में अधिनियम में हुए बदलाव, इसके विजन एवं उद्देश्य, पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका एवं दायित्व, विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं की तैयारी एवं अनुमोदन, परिवारों का पंजीकरण, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी करने, परिसंपत्तियों की योजना एवं निगरानी सहित विभिन्न विषयों पर जानकारी दी गई।
इसके साथ ही योजना में पारदर्शिता, सामाजिक जवाबदेही, शिकायत निवारण एवं सामाजिक ऑडिट तथा अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के साथ अभिसरण के संबंध में भी विस्तार से चर्चा की गई।
100 से बढ़ाकर 125 दिन रोजगार की गारंटी
जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को ग्रामीण भारत को विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ने के उद्देश्य से लागू किया गया है। अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष गारंटीकृत अकुशल रोजगार की सीमा 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने की जानकारी दी गई।
उन्होंने बताया कि यह अधिनियम केवल मजदूरी आधारित रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना और जलवायु-अनुकूल टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर भी विशेष ध्यान देता है।
कार्यक्रम में बताया गया कि पीएम गति शक्ति एवं विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के साथ एकीकृत व्यवस्था में बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग एवं डिजिटल ट्रैकिंग जैसी तकनीकों के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को रोकने में मदद करना है।
