ब्यूरो चीफ प्रमोद मिश्रा बलरामपुर ✍️
बलरामपुर। जनपद के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर और रुचिकर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में विद्यालयों में संचालित स्कूल लाइब्रेरी एवं लर्निंग कॉर्नर बच्चों को पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी पुस्तकों से जुड़ने का अवसर दे रहे हैं।
विद्यालयों की लाइब्रेरी में बच्चों की आयु और रुचि के अनुरूप कहानी, सामान्य ज्ञान, प्रेरक प्रसंग, बाल साहित्य सहित विभिन्न रोचक एवं ज्ञानवर्धक पुस्तकें उपलब्ध हैं। छात्र-छात्राएं इन पुस्तकों का नियमित अध्ययन कर नई जानकारियां हासिल कर रहे हैं। इससे बच्चों में पढ़ने की रुचि बढ़ने के साथ-साथ स्वयं सीखने और नई चीजों को जानने की जिज्ञासा भी विकसित हो रही है।
स्टडी कॉर्नर बन रहे आकर्षण का केंद्र
विद्यालयों में बनाए गए स्टडी कॉर्नर बच्चों के लिए अध्ययन का सहज और आकर्षक माध्यम बन रहे हैं। बच्चे अपनी पसंद की पुस्तक चुनकर पढ़ते हैं और पढ़ी गई कहानियों व विषयों पर शिक्षकों तथा साथी विद्यार्थियों के साथ चर्चा भी करते हैं। इससे विद्यालयों में पठन-पाठन का सकारात्मक वातावरण विकसित हो रहा है।
नियमित पुस्तक अध्ययन से बच्चों के पठन कौशल, शब्दावली, भाषा ज्ञान, कल्पनाशक्ति, समझ एवं अभिव्यक्ति क्षमता को बेहतर बनाने में सहायता मिल रही है। किताबों से जुड़ाव बच्चों को प्रश्न पूछने, नई बातों को समझने और अपने विचारों को बेहतर ढंग से व्यक्त करने के लिए भी प्रेरित कर रहा है।
कई विद्यालयों में बच्चे उत्साहपूर्वक कर रहे अध्ययन
इसी क्रम में विकासखंड बलरामपुर के प्राथमिक विद्यालय बांकी, प्राथमिक विद्यालय कटिया एवं प्राथमिक विद्यालय धर्मनगर में छात्र-छात्राएं लाइब्रेरी और स्टडी कॉर्नर का उपयोग करते हुए रुचिकर एवं प्रेरणादायी पुस्तकों का उत्साहपूर्वक अध्ययन कर रहे हैं।
बच्चों में पुस्तकों के प्रति उत्सुकता और नियमित अध्ययन की आदत विद्यालयों में विकसित हो रही सकारात्मक शैक्षिक संस्कृति को दर्शाती है।
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखते हुए बच्चों को पढ़ने, समझने, सोचने और स्वयं सीखने के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्कूल लाइब्रेरी एवं लर्निंग कॉर्नर इसी दिशा में बच्चों के सर्वांगीण शैक्षिक विकास का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।
किताबों से बच्चों की दोस्ती और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देकर परिषदीय विद्यालयों में सीखने की प्रक्रिया को अधिक रुचिकर, आनंददायक एवं प्रभावी बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
