ब्यूरो रिपोर्ट प्रमोद मिश्रा
बलरामपुर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बलरामपुर द्वारा शनिवार को सिविल न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत की अध्यक्षता जनपद एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उत्कर्ष चतुर्वेदी ने की।
राष्ट्रीय लोक अदालत में आमजन को सुलभ, त्वरित एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आपसी सुलह-समझौते के आधार पर बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण किया गया। फौजदारी, सिविल, पारिवारिक, मोटर दुर्घटना दावा, राजस्व, एमवी एक्ट सहित विभिन्न प्रकृति के लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों को लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित किया गया।
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं सिविल जज (प्रवर खण्ड) यशपाल वर्मा ने बताया कि जिला एवं सत्र न्यायालय, बलरामपुर में कुल 14,432 वाद नियत किए गए, जिनमें से 7,110 वादों का निस्तारण किया गया। वहीं राजस्व न्यायालयों में प्री-लिटिगेशन एवं लंबित कुल 46,178 वाद नियत किए गए और सभी मामलों का निस्तारण कर दिया गया। इस प्रकार राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 53,288 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण हुआ तथा करीब 11 करोड़ रुपये की धनराशि का समाधान किया गया।
जनपद एवं सत्र न्यायाधीश उत्कर्ष चतुर्वेदी के न्यायालय में सिविल के 10 वाद नियत किए गए, जिनमें 7 का निस्तारण हुआ। फौजदारी के 4 वादों में से 2 का निस्तारण किया गया। प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय विनोद कुमार बरनवाल द्वारा पारिवारिक मामलों से संबंधित 154 वाद नियत किए गए, जिनमें 79 का निस्तारण करते हुए 41,04,800 रुपये की धनराशि का समाधान किया गया।
पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण आलोक कुमार शुक्ला द्वारा 49 वाद नियत किए गए, जिनमें 33 का निस्तारण कर 3,50,74,105 रुपये की धनराशि का समाधान किया गया। अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-06 प्रदीप कुमार तृतीय द्वारा नियत 75 के सभी 75 वादों का निस्तारण किया गया।
विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट अवधेश कुमार-II द्वारा 23 वादों में से 8 का निस्तारण करते हुए 3,000 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम राहुल सिंह-द्वितीय द्वारा 2 वादों का निस्तारण करते हुए 1,000 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनूप कुमार पाण्डेय द्वारा फौजदारी के 3,350 वाद नियत कर सभी का निस्तारण किया गया। सिविल जज (प्रवर खण्ड)/एसीजेएम शैलेष कुमार मौर्या द्वारा एमवी एक्ट एवं अन्य प्रकृति के 1,560 वादों में से 280 का निस्तारण कर 17,230 रुपये जुर्माना वसूल किया गया। अपर सिविल जज (प्रवर खण्ड)/एमपी-एमएलए राहुल आनन्द द्वितीय द्वारा 1,977 वादों में से 650 का निस्तारण कर 7,770 रुपये जुर्माना वसूल किया गया।
सिविल जज (जू० डि०)/जेएम (आर्थिक अपराध), उतरौला प्रभात कुमार दूबे द्वारा 3 सिविल वादों तथा अन्य प्रकृति के 210 वादों का निस्तारण किया गया और 2,050 रुपये जुर्माना वसूल किया गया। सिविल जज (जू० डि०) असगर अली द्वारा एमवी एक्ट एवं अन्य प्रकृति के 1,872 वादों में से 203 का निस्तारण कर 3,500 रुपये जुर्माना वसूल किया गया। इसके साथ ही 6 सिविल वादों में से 4 का निस्तारण किया गया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट-I नीरू आनन्द द्वारा फौजदारी के 2 वादों का निस्तारण किया गया। एमवी एक्ट एवं अन्य प्रकृति के 2,741 वादों में से 802 का निस्तारण कर 14,100 रुपये जुर्माना वसूल किया गया। अपर सिविल जज (जू० डि०), उतरौला सिद्धांत सोलंकी द्वारा एक सिविल वाद सहित अन्य प्रकृति के सभी 288 वादों का निस्तारण करते हुए 2,880 रुपये जुर्माना वसूल किया गया।
अपर सिविल जज (जू० डि०) रेनू गौतम द्वारा सिविल के 3 वादों का निस्तारण किया गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट-II मेघाली सिंह द्वारा फौजदारी, एमवी एक्ट एवं अन्य प्रकृति के 1,585 वादों में से 590 का निस्तारण करते हुए 6,330 रुपये जुर्माना वसूल किया गया। सिविल जज (जू० डि०)/द्रुतगामी न्यायालय/महिलाओं के विरुद्ध अपराध प्रज्ञा पाण्डेय द्वारा फौजदारी एवं अन्य प्रकृति के 371 वादों का निस्तारण कर 21,820 रुपये जुर्माना वसूल किया गया।
ग्राम न्यायाधिकारी, तुलसीपुर आस्था सिंह द्वारा अन्य प्रकृति के 150 वाद नियत किए गए और सभी 150 का निस्तारण करते हुए 1,500 रुपये जुर्माना वसूल किया गया।
लोक अदालत में जनोपयोगी गतिविधियों का भी आयोजन
राष्ट्रीय लोक अदालत को केवल वादों के निस्तारण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि जनोपयोगी गतिविधियों को भी इससे जोड़ा गया। लोक अदालत में पहुंचे लोगों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा जरूरत के अनुसार दवाइयों का वितरण किया गया।
इस दौरान जिला कारागार, बलरामपुर के प्रशिक्षित बंदियों द्वारा निर्मित अगरबत्ती भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। वहीं श्रम विभाग की ओर से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने तथा ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से बड़ी संख्या में लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों का त्वरित निस्तारण कर पक्षकारों को सुलह-समझौते के आधार पर राहत प्रदान की गई। आयोजन ने आमजन को कम समय और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
