धान की फसल को कीट एवं रोगों से बचाने के लिए कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

 


ब्यूरो रिपोर्ट प्रमोद मिश्रा

बलरामपुर। वर्तमान मौसम एवं धान की फसल की अवस्था को देखते हुए धान में विभिन्न कीट एवं रोगों के प्रकोप की संभावना बनी हुई है। किसानों की फसल को संभावित नुकसान से बचाने के लिए कृषि विभाग ने आवश्यक सुझाव एवं संस्तुतियां जारी की हैं। विभाग ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने और कीट अथवा रोग के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते उचित प्रबंधन करने की अपील की है।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में धान की फसल में विशेष रूप से फाल्स स्मट (हल्दिया रोग) एवं गंधी बग के प्रकोप की संभावना रहती है। समय से इनकी पहचान एवं नियंत्रण कर फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


फाल्स स्मट/हल्दिया रोग से बचाव

फाल्स स्मट धान की फसल में लगने वाला फफूंदजनित रोग है। इसके गंभीर प्रकोप से उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके लक्षण धान की बालियों में दिखाई देते हैं। प्रभावित बालियों में दानों के स्थान पर गोल-गोल गांठें बनने लगती हैं, जो शुरुआत में हल्के पीले रंग की और बाद में सूखकर हरे-काले रंग की हो जाती हैं।

रोग के नियंत्रण के लिए धान की बालियां निकलने तथा दानों में दूध बनने की अवस्था के दौरान समय से फफूंदनाशी का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। कृषि विभाग की संस्तुति के अनुसार हाइड्रॉक्सीक्लोराइड 77 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर को 500–600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा एजोक्सीस्ट्रोबिन 18.2 प्रतिशत + डाइफेनोकोनाजोल 11.4 प्रतिशत एससी की 1 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

गंधी बग की पहचान एवं नियंत्रण

धान की फसल में गंधी बग भी प्रमुख नुकसानदायक कीट है। इसके प्रौढ़ एवं शिशु लंबे, भूरे रंग के और विशेष गंध वाले होते हैं। ये धान की बालियों की दुग्धावस्था में दानों का रस चूसते हैं, जिससे दाने कमजोर अथवा अधूरे रह सकते हैं और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

गंधी बग के नियंत्रण के लिए फेनवेलरेट 0.04 प्रतिशत डीपी अथवा मैलाथियान धूल 5 प्रतिशत डीपी या अन्य संस्तुत पाउडर का 20–25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुरकाव करने की सलाह दी गई है। इसके अतिरिक्त थायोमेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर को 500–600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।

नियमित रूप से खेतों की निगरानी करें किसान

कृषि विभाग ने किसानों से धान की फसल का नियमित निरीक्षण करने की अपील की है। कीट अथवा रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नियंत्रण के उपाय अपनाए जाएं। दवाओं का प्रयोग निर्धारित मात्रा और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही किया जाए।

किसान खेत में किसी भी प्रकार के कीट अथवा रोग के प्रकोप की स्थिति में सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली के व्हाट्सऐप नंबर 9452247111 अथवा 9452257111 पर फसल की फोटो भेजकर समस्या के समाधान के लिए सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

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