लाखों की लागत से बने पंचायत भवनों पर सवाल, कई सचिवालयों पर लटके ताले; ग्रामीणों ने जांच की मांग की

 

सहायक ब्यूरो चीफ सुधीर सिंह कुम्भाणी, सीतापुर ✍️

सकरन, सीतापुर। विकासखंड सकरन की कई ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए ग्राम सचिवालय (पंचायत भवन) ग्रामीणों के उपयोग में नहीं आ पाने को लेकर सवालों के घेरे में हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई पंचायत भवनों पर ताले लटके हैं और नियमित रूप से बैठकें एवं पंचायत संबंधी कार्य नहीं हो पा रहे हैं।

ग्रामीणों ने पंचायत भवनों के निर्माण, मरम्मत और वहां उपलब्ध कराई गई सुविधाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग जिलाधिकारी सीतापुर से की है।

शाहपुर पंचायत में सुविधाएं अधूरी होने का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत शाहपुर में लाखों रुपये की लागत से पंचायत सचिवालय का निर्माण कराया गया और उसका भुगतान भी हो चुका है, लेकिन भवन में पानी की टंकी सहित कुछ आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सहायक नियमित रूप से सचिवालय में उपस्थित नहीं होते, जबकि उन्हें मानदेय का भुगतान किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

नसीरपुर में पंचायत सचिवालय के उपयोग को लेकर सवाल

ग्राम पंचायत नसीरपुर को लेकर भी ग्रामीणों ने कई आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत सहायक के विवाह के बाद ससुराल चले जाने के बावजूद सचिवालय में कार्य प्रभावित है।

इसके अलावा ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रधान की ओर से इन्वर्टर, बैटरी, मोबाइल और रंगाई-पुताई आदि के नाम पर धनराशि खर्च की गई, लेकिन पंचायत भवन में नियमित बैठकें नहीं हो रही हैं।

अन्य पंचायतों में भी स्थिति पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने रौवापुर नेवादा में सामुदायिक भवन को पंचायत भवन के रूप में इस्तेमाल किए जाने का दावा किया है। वहीं गठियाकला में तालाब की जमीन पर पंचायत भवन के निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

अदवारी में पंचायत सचिवालय की मरम्मत के नाम पर धनराशि खर्च किए जाने के बावजूद कार्य की गुणवत्ता और वास्तविक स्थिति की जांच की मांग की गई है। वहीं उल्लहा में भी पंचायत सचिवालय के नियमित संचालन को लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से जांच की मांग की

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवनों के निर्माण और रखरखाव पर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद यदि इनका उपयोग ग्रामीणों और पंचायत संबंधी कार्यों के लिए नहीं हो रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी सीतापुर से शाहपुर, नसीरपुर समेत संबंधित ग्राम पंचायतों के पंचायत सचिवालयों की जांच कराकर अभिलेखों, भुगतान और वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराने तथा अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

नोट: पंचायतों से जुड़े वित्तीय अनियमितता, मानदेय या कार्य में लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। संबंधित विभाग का पक्ष मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जा सकता है।

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