एमएलके पीजी कॉलेज के एमएससी वनस्पति विज्ञान के विद्यार्थियों ने किया दक्षिण भारत का शैक्षिक भ्रमण


ब्यूरो चीफ प्रमोद मिश्रा, बलरामपुर ✍️

बलरामपुर। एमएलके पीजी कॉलेज, बलरामपुर के वनस्पति विज्ञान विभाग के एमएससी के छात्र-छात्राओं ने शैक्षिक भ्रमण के अंतर्गत दक्षिण भारत के विभिन्न ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण किया। विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन के नेतृत्व तथा डॉ. मोहम्मद अकमल और डॉ. वीर प्रताप सिंह की अगुवाई में आयोजित इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ विभिन्न क्षेत्रों की भौगोलिक, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं का प्रत्यक्ष अनुभव कराना रहा।

मदुरै के मीनाक्षी मंदिर की स्थापत्य कला देखी

शैक्षिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने तमिलनाडु के मदुरै स्थित प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर का भ्रमण किया। देवी मीनाक्षी और भगवान सुंदरेश्वर को समर्पित यह मंदिर दक्षिण भारत के प्रमुख ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों में शामिल है।

विद्यार्थियों ने मंदिर की भव्य द्रविड़ स्थापत्य शैली, रंग-बिरंगे गोपुरम और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्हें दक्षिण भारतीय मंदिरों की वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का अवसर मिला।

रामेश्वरम में रामनाथस्वामी मंदिर के किए दर्शन

इसके बाद विद्यार्थियों ने मदुरै से लगभग 175 किलोमीटर दूर स्थित रामेश्वरम द्वीप का भ्रमण किया। यह क्षेत्र धार्मिक महत्ता, समुद्री प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है।

यहां विद्यार्थियों ने भगवान शिव को समर्पित प्रसिद्ध रामनाथस्वामी ज्योतिर्लिंग मंदिर के दर्शन किए। उन्होंने मंदिर की स्थापत्य कला, लंबी गलियों, नक्काशीदार स्तंभों और 22 पवित्र कुओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।

पंबन पुल के प्राकृतिक दृश्यों ने किया आकर्षित

रामेश्वरम पहुंचने के मार्ग में समुद्र के ऊपर बना प्रसिद्ध पंबन पुल विद्यार्थियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। यह पुल रामेश्वरम द्वीप को भारत की मुख्य भूमि से जोड़ता है। समुद्र के बीच बने इस पुल से दिखाई देने वाले मनोरम दृश्यों ने विद्यार्थियों को आकर्षित किया।

इस दौरान विद्यार्थियों ने क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं और समुद्री परिवेश का भी अवलोकन किया। भ्रमण के माध्यम से उन्हें तटीय क्षेत्रों की प्राकृतिक परिस्थितियों को समझने का अवसर मिला।

धनुषकोडी में तटीय पर्यावरण का किया अवलोकन

भ्रमण के अगले चरण में विद्यार्थियों ने रामेश्वरम द्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित धनुषकोडी का दौरा किया। यह क्षेत्र अपने सुंदर समुद्र तटों, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक अवशेषों के लिए जाना जाता है।

विद्यार्थियों को बताया गया कि वर्ष 1964 में आए विनाशकारी चक्रवात ने इस प्राचीन नगर को भारी नुकसान पहुंचाया था, जिसके बाद यह क्षेत्र वीरान हो गया। यहां विद्यार्थियों ने तटीय पर्यावरण और समुद्री क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं का अध्ययन किया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम द्वारा लंका जाने के लिए समुद्र पर सेतु निर्माण की योजना से भी यह क्षेत्र जुड़ा हुआ है। रामसेतु का रामायण की परंपरा में विशेष महत्व है। इस प्रकार विद्यार्थियों को दक्षिण भारत की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को जानने का अवसर मिला।

विद्यार्थियों को मिला व्यावहारिक ज्ञान

इस शैक्षिक भ्रमण में श्रीमती रीना, श्रीमती अमृता सिंह, रिचा उपाध्याय, इपशिता, सौम्या सिंह, मोहम्मद फैज, सौम्य पांडेय, लक्ष्मी सोनी और शशि चौधरी सहित अन्य छात्र-छात्राएं शामिल रहे।

भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के साथ-साथ समुद्री परिवेश, तटीय भूगोल और प्राकृतिक विशेषताओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। ऐसे शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों के ज्ञान को विस्तृत करने और उन्हें व्यावहारिक अध्ययन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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