धान की सीधी बुवाई से कम लागत में बेहतर उत्पादन की संभावनाएं: जिला कृषि अधिकारी

ब्यूरो चीफ प्रमोद मिश्रा बलरामपुर ✍️ 
बलरामपुर।
किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने तथा पर्यावरण और मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण के उद्देश्य से प्रदेश सरकार धान की सीधी बुवाई तकनीक को बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में विकासखंड हरैया के ग्राम दानीडीह, पोस्ट बारहापारा में किसान गोष्ठी एवं धान की फसल की क्रॉप कटिंग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देने के साथ उनके संभावित आर्थिक लाभों से अवगत कराया गया।

कार्यक्रम का आयोजन कृषि विभाग, अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (IRRI), सवाना सीड्स प्राइवेट लिमिटेड और उत्तर प्रदेश डाइवर्सिफाइड एग्रीकल्चर सपोर्ट प्रोजेक्ट (UPDASP) के समन्वय से किया गया। गोष्ठी में आसपास के पांच गांवों के किसानों ने भाग लिया और धान की सीधी बुवाई की तकनीक, उत्पादन क्षमता तथा खेती की लागत कम करने के उपायों की जानकारी प्राप्त की।

श्रम, समय और सिंचाई की लागत में हो सकती है कमी

इस अवसर पर जिला कृषि अधिकारी उपेंद्र नाथ खरवार ने बताया कि धान की सीधी बुवाई किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी तकनीक साबित हो सकती है। पारंपरिक रोपाई पद्धति की तुलना में इस विधि में पौध तैयार करने और रोपाई की जरूरत नहीं होती, जिससे श्रम, समय तथा सिंचाई पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि धान की सीधी बुवाई से जल संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ खेती की लागत कम करने और मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में भी सहायता मिल सकती है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाकर उत्पादन बढ़ाने और अपनी आय में वृद्धि करने का आह्वान किया।

क्रॉप कटिंग में 31 क्विंटल प्रति एकड़ उपज दर्ज

किसान गोष्ठी के दौरान ग्राम दानीडीह के प्रगतिशील किसान ननकऊ प्रसाद के खेत में लगाए गए सवाना 7501 हाइब्रिड धान की क्रॉप कटिंग कराई गई। क्रॉप कटिंग के आधार पर खेत में 31 क्विंटल प्रति एकड़ उपज प्राप्त हुई।

कार्यक्रम में मौजूद कृषि विशेषज्ञों ने मौजूदा मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए इस उत्पादन को उत्साहजनक बताया। साथ ही सवाना 7501 हाइब्रिड धान की खेती करने वाले अन्य किसानों से भी 32 से 35 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन मिलने की जानकारी साझा की गई।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि वास्तविक उपज भूमि की उर्वरता, मौसम और फसल प्रबंधन जैसे कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। उन्होंने बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत बीजों के चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण को महत्वपूर्ण बताया।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दी तकनीकी जानकारी

गोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (IRRI) के वैज्ञानिक डॉ. विपिन अहलावत और डॉ. विपिन शर्मा ने किसानों को धान की सीधी बुवाई की वैज्ञानिक पद्धति, बीज चयन, पोषक तत्व प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण और फसल की उत्पादकता बढ़ाने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी।

वैज्ञानिकों ने बताया कि आधुनिक कृषि तकनीकों का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि खेती को किफायती, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाना भी है।

वहीं, सवाना सीड्स प्राइवेट लिमिटेड के जोनल हेड मलय मिश्रा, रीजनल मैनेजर दिग्विजय सिंह और क्षेत्रीय प्रबंधक चंद्रजीत यादव ने सवाना 7501 हाइब्रिड धान की विशेषताओं तथा बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी फसल प्रबंधन के बारे में किसानों को जानकारी दी।

आधुनिक कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए किया प्रेरित

कार्यक्रम में किसानों ने क्रॉप कटिंग के परिणामों का अवलोकन किया और धान की सीधी बुवाई से होने वाले संभावित आर्थिक लाभों को लेकर कृषि वैज्ञानिकों से संवाद किया।

इस अवसर पर उप निदेशक कृषि, कृषि रक्षा अधिकारी, कृषि विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी, सवाना सीड्स के प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक तथा आसपास के पांच गांवों से बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाने, खेती की लागत कम करने और बेहतर उत्पादन के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।

ब्यूरो चीफ प्रमोद मिश्रा, बलरामपुर ✍️

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