ब्यूरो रिपोर्ट प्रमोद मिश्रा
बलरामपुर। पचपेड़वा स्थित माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में विद्या भारती जन शिक्षा समिति, जनपद बलरामपुर के तत्वावधान में जनपदीय ज्ञान-विज्ञान एवं संस्कृति महोत्सव का आयोजन उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। महोत्सव में जनपद के विद्या भारती से संबद्ध विभिन्न विद्यालयों के भैया-बहनों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता और बौद्धिक क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
महोत्सव के अंतर्गत संस्कृति प्रसंग मंच, विज्ञान प्रसंग मंच, मूर्तिकला सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक सोच, सांस्कृतिक अभिरुचि, कलात्मक प्रतिभा और सृजनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
कार्यक्रम में जनपद बलरामपुर के जिला मंत्री श्याम सुंदर, विद्यालय के प्रबंधक रामशरण गुप्ता, कोषाध्यक्ष मनोज त्रिपाठी, प्रधानाचार्य मनीष तिवारी तथा जनपद के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य सहित अन्य अतिथि एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अतिथियों का परिचय एवं स्वागत विद्यालय के प्रधानाचार्य मनीष तिवारी ने कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के कोषाध्यक्ष मनोज त्रिपाठी ने की।
प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले भैया-बहनों को आगामी प्रांतीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने का अवसर मिलेगा। इस उपलब्धि से विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उपस्थित अतिथियों एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य मनीष तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के लिए विज्ञान के ज्ञान के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों की समझ होना भी अत्यंत आवश्यक है। विज्ञान विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की भावना विकसित करता है, जबकि भारतीय संस्कृति उन्हें जीवन-मूल्यों, परंपराओं और राष्ट्रीय गौरव से जोड़ती है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने, आत्मविश्वास बढ़ाने और नई संभावनाओं की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। इस प्रकार के आयोजन शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में भी सहायक होते हैं।
अंत में कल्याण मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। महोत्सव ने विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सांस्कृतिक चेतना और आत्मविश्वास विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
