सकरन में स्वच्छ भारत मिशन पर सवाल! लाखों के RRC सेंटर बदहाल, कूड़ा उठाने वाले वाहन भी बेकार


सहायक ब्यूरो चीफ सुधीर सिंह कुम्भाणी, सीतापुर ✍️

सकरन (सीतापुर)। गांवों को स्वच्छ और साफ-सुथरा रखने के उद्देश्य से संचालित स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (RRC) अब बदहाली का शिकार बताए जा रहे हैं। कहीं सेंटर अधूरे पड़े हैं तो कहीं भवन टूट-फूट रहे हैं। आरोप है कि कूड़ा उठाने के लिए खरीदे गए वाहन भी कई ग्राम पंचायतों में उपयोग के बजाय खड़े होकर जंग खा रहे हैं या निजी कार्यों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

13 ग्राम पंचायतों में RRC सेंटरों की हालत खराब होने का आरोप

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, सकरन खुर्द, खानपुर, देवतापुर, सरैया कला, नसीरपुर, रत्नापुर, सांडा, पटनी, दौदापुर, तारापारा, शाहपुर, कौवा खेड़ा और दुगाना सहित कई ग्राम पंचायतों में RRC सेंटरों की स्थिति संतोषजनक नहीं बताई जा रही है।

बताया गया है कि देवतापुर में सेंटर का निर्माण अधूरा है, जबकि शाहपुर, सरैया कला, नसीरपुर, पटनी, सकरन खुर्द, कौवा खेड़ा, रत्नापुर और सांडा में सेंटरों के भवनों में टूट-फूट होने की शिकायत है। इन केंद्रों का नियमित संचालन नहीं होने से कूड़ा निस्तारण व्यवस्था प्रभावित होने का आरोप लगाया जा रहा है।

कूड़ा वाहन खड़े या निजी इस्तेमाल में होने का आरोप

ग्रामीणों की शिकायत है कि कई ग्राम पंचायतों में कूड़ा ढोने के लिए खरीदे गए वाहन नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ वाहन लंबे समय से खड़े हैं और कुछ का उपयोग कथित तौर पर ग्राम प्रधानों के निजी कार्यों में किया जा रहा है। यदि ये आरोप सही हैं, तो सरकारी धन से खरीदे गए संसाधनों के उपयोग और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

गांवों में गंदगी और बीमारी का खतरा

कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था प्रभावित होने से ग्रामीण इलाकों में गंदगी फैलने और मच्छर-मक्खियों का प्रकोप बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छता व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को नियमित निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल

बताया गया है कि इससे पहले भी क्षेत्र के कई RRC सेंटरों की बदहाली को लेकर समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित हुई थीं, लेकिन शिकायतों के बावजूद ठोस सुधार दिखाई नहीं देने का आरोप है।

इस संबंध में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), सकरन से फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन कवरेज क्षेत्र से बाहर होने के कारण बातचीत नहीं हो सकी। इसलिए संबंधित अधिकारी का पक्ष प्राप्त नहीं हो पाया।

अब सवाल यह है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत खर्च की गई सरकारी धनराशि से बने इन केंद्रों की नियमित जांच कब होगी और गांवों में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था कब सुधरेगी? ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने और RRC सेंटरों को चालू कराने की मांग की है।

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