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खरे सोने चांदी के व्यापार में कालाबाजारी सूदखोरी



2% ब्याज पर कर्ज देने का नियम, वसूलते हैं 10 से 20 फीसदी ब्याज सुनार, सूदखारों के 80% लाइसेंस हैं महिलाओं के नाम पर

खरे सोने चांदी के व्यापार में ‌काले कारोबार में संचालित सूदखोरी



➡ अगर आपको ज्यादा धन कमाने की ललायत है तो बेशक कर लीजिए ज्वेलर्स की दुकान और बन जाइए एक बङे सूदखोर सुनार। यह हम नहीं बल्कि बकेवर और लखना में खुली दर्जनों ज्वेलर्स की दुकान चीख चीख कर कह रही है। सोने के खरे व्यापार में सूदखोरी का काला बाजार वर्तमान में धड़ले से संचालित है जहां ना तो मानक है और ना ही नियम कानून। फिर भी अगर कहीं तो जिम्मेदार अधिकारी बेखबर।

➡ सूदखोरों की प्रताड़ना के मामले सामने आना लाजमी है। तहसील कार्यालय से जारी हो रहे साहूकारी के लाइसेंस की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। व्यापारियों से लेकर गरीबों तक  के लोगों का उत्पीड़न होने के बाद की आत्महत्या के पीछे भी यह एक वजह रही।

इस बीच तहसील से महज एक हजार रुपए के स्टांप और सादे कागज पर आवेदन देकर ब्याज पर पैसा चलाने का लाइसेंस बांट दिया जाता है। साहूकार न तो विभाग को बांटे गए कर्ज की लिस्ट उपलब्ध कराते हैं।और न ही लाइसेंस देने के बाद अफसर इस तरफ झांकते हैं।

 ➡ गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर 2 प्रतिशत ब्याज पर पैसा बांटने का लाइसेंस लेकर 10-20 परसेंट ब्याज पर कर्ज देकर कुछ ही सालों में मूलधन के बराबर ब्याज वसूलने का सिलसिला चल रहा है। तहसील कार्यालय की कानून-गो शाखा से साहूकारी का लाइसेंस दिया जाता है। स्टांप शुल्क जमा करने वालों का रजिस्टर में उनका नाम एक साल के लिए दर्ज हो जाता है।

एक बात तो साफ है यदि इन सुनारों पर लाइसेंसी साहूकारों की पड़ताल की तो पता चला कि दर्ज नामों में ज्यादातर महिलाओं को लाइसेंस दिए गए हैं। कर्जदार से किसी तरह का विवाद सामने आता भी है। तो इसकी वजह सिर्फ यह है कि महिला लाइसेंसी पर पुलिस पूछताछ में परेशान नहीं कर पाएगी। इसलिए उनकी आड़ में पुरुष यानी इनके पति, पुत्र आदि साहूकारी का धंधा कर रहे हैं।

 साहूकारी का लाइसेंस लेने वालों में भाजपा-सपा दोनाें दलों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। यदि देखा जाए तो नियमावली के अनुसार लाइसेंस 2 परसेंट ब्याज से ज्यादा का नहीं दिया जाता।

ब्यौरा पेश नहीं करते साहूकार, 👇👇👇

➡ 10 गुना ज्यादा ब्याज पर बांटकर जेवर, संपत्ति रख रहे गिरवी : शहरी सीमा क्षेत्र में सूद का कारोबार करने वाले को  साहूकार अधिनियम के तहत लाइसेंस लेना होता है। इसके बाद गाइडलाइन के हिसाब से ब्याज का प्रतिशत और उनकी साल में ब्याज पर चलाई जाने वाली राशि पहले ही तय कर दी जाती है। इसके बाद साहूकार को साल भर में एक बार अपनी बैलेंस सीट भी पेश करना होती है। साहूकारी के लाइसेंस के नियमों का उल्लंघन कर बांटे गए कर्ज पूरा ब्यौरा ही पेश नहीं करते।

❓❓ आखिर बड़ा प्रश्नचिह्न यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इन साहूकारी का लाइसेंस लिए सूदखोरी का काला कारोबार कर रहे सुनारों का व्यौरा क्यों नहीं लेते और इन पर कार्यवाही क्यों नहीं होती।???


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शेष अगली खबर में काला बाजारी कर रहे सूदखोरों की लिस्ट नाम सहित दर्शायी जायेगी। और किस कदर आमजनमानस इनके उत्पीङन से प्रभावित है दिखाया जायेगा।

''मुख्य संपादक मो शोएब''

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