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"मां की भागीदारी से संवरेगा बच्चों का भविष्य – शिक्षा और विकास की नई दिशा की ओर कदम"

सीतापुर, विकास खंड सकरन अंकुर कुमार की रिपोर्ट 

विकास खंड सकरन के कम्पोजिट विद्यालय सुमरावां में आयोजित माता उन्मुखीकरण बैठक में बच्चों की शिक्षा और सर्वांगीण विकास को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में खंड शिक्षा अधिकारी ओंकार सिंह ने माताओं की जिम्मेदारी और उनकी भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में माताओं का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।

खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि पिता की तुलना में माताएं बच्चों की दिनचर्या और आदतों पर अधिक बारीकी से नजर रख सकती हैं। वे बच्चों को बेहतर तरीके से समझती हैं और उनकी समस्याओं को जल्दी पहचानकर समाधान कर सकती हैं। उन्होंने माताओं से अनुरोध किया कि वे न केवल बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें बल्कि उनकी पढ़ाई में भी रुचि लें और शिक्षक से संवाद बनाए रखें।

बच्चों के समग्र विकास पर जोर

बैठक में बच्चों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सांस्कृतिक और नैतिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में केवल शिक्षकों की भूमिका नहीं होती, बल्कि परिवार, विशेषकर मां, महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बच्चों को अच्छी आदतें सिखाने, समय का पाबंद बनाने और उन्हें नैतिक मूल्यों से परिचित कराने में माताओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

विद्यालय के अध्यापक रवींद्र मिश्रा ने कहा, "बच्चे देश का भविष्य हैं। अगर उनकी नींव मजबूत होगी, तो आने वाला समाज भी बेहतर होगा। माताओं की जागरूकता और सहयोग से हम बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।"

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भी रही भागीदारी

इस अवसर पर प्रधानाचार्य मोहम्मद उमर, शिक्षक अनुराग बाजपेई, अजीत सिंह, दिनेश कुमार, और आंगनबाड़ी कार्यकत्री रुकमणी देवी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने माताओं को बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और पोषण पर भी ध्यान देने की सलाह दी।

आंगनबाड़ी कार्यकत्री ने कहा कि छोटे बच्चों के शारीरिक विकास के लिए संतुलित आहार और समय पर टीकाकरण बहुत जरूरी है। माताओं को बच्चों के खान-पान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

जलपान और सकारात्मक संवाद के साथ बैठक का समापन

बैठक का समापन जलपान और अनौपचारिक संवाद के साथ किया गया। इस दौरान माताओं ने भी अपने अनुभव साझा किए और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी बैठकों से माता-पिता को जागरूक करने और बच्चों की शिक्षा में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार करना और माताओं को बच्चों के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना था। सभी प्रतिभागियों ने इस बैठक को सकारात्मक और उपयोगी बताया।

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