(रिपोर्ट: अंकुल गुप्ता)
सकरन/सीतापुर। ग्राम पंचायत शाहपुर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। रोजगार सेवक और ग्राम प्रधान की मनमानी के चलते मजदूरों को काम नहीं मिल रहा, जिससे वे पलायन को मजबूर हो गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब खुदाई जैसे कार्यों में ठेका प्रणाली को अपनाया गया है, जिसमें स्थानीय मजदूरों की बजाय सिर्फ फोटो खिंचवाकर काम का दिखावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि ग्राम प्रधान और रोजगार सेवक ने पहले से गहरे तालाब का भारी-भरकम एस्टीमेट बनवाकर तालाब का पानी निकलवाया और उसमें मौजूद लाखों की मछलियां पकड़वाकर बेच दीं। इसके बाद फर्जी नामों से मजदूरों के नाम मास्टर रोल में चढ़ाकर सरकारी धन की बंदरबांट की गई।
इस पूरे मामले में रोजगार सेवक अनिल कुमार की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, जिन पर पहले भी इस तरह के आरोप लग चुके हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि इस गड़बड़ी की खबरें कई बार विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसरों की नींद अब तक नहीं टूटी है। इसी तरह की स्थिति पास की ग्राम पंचायत उल्लहा, किरतापुर और देवतापुर में भी बनी हुई है, जहां काम तो महीनों से रुका पड़ा है, लेकिन मजदूरी फर्जी तरीके से निकाल ली जा रही है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में गरीबों के हक के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो सके।
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