ब्यूरो रिपोर्ट: जहीन खान ✍️
लखनऊ: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU), लखनऊ में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इंडिया के सहयोग से डिप्थीरिया, पर्टुसिस और टायफॉइड के प्रयोगशाला निदान पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन 28 से 30 जुलाई तक किया गया।
इस हैंड्स-ऑन कार्यशाला का उद्घाटन प्रो. विमला वेंकटेश के नेतृत्व में हुआ। आयोजन सचिव के रूप में डॉ. शीतल वर्मा और डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कार्यशाला का सफल संचालन किया। मुख्य अतिथि डॉ. दीपा शर्मा (WHO इंडिया) ने प्रयोगशाला क्षमताओं को सुदृढ़ करने और वैक्सीन-नियंत्रित रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे AIIMS, JIPMER, PGIMER, CMC वेल्लोर आदि से आए माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को PCR, ऑटोमेटेड ब्लड कल्चर, MALDI-TOF और AST जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य सटीक, समयबद्ध और मानकीकृत निदान सुनिश्चित करने के लिए माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स को अद्यतन तकनीकी प्रशिक्षण देना था। प्रो. विमला ने कहा कि “KGMU, WHO के साथ मिलकर जन स्वास्थ्य सुधार में एक अहम भूमिका निभा रहा है।”
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