🚨 ब्यूरो रिपोर्ट: शशांक मिश्रा
लखनऊ के काकोरी क्षेत्र में खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब सरकारी ज़मीन भी उनके लिए खुली लूट बन गई है। समदा चौकी से महज़ 1.5 किलोमीटर दूर मौन्दा स्थित सरकारी चरागाह की भूमि पर शनिवार देर रात माफियाओं ने अवैध खनन का खुला खेल खेला। पूरी रात भारी मशीनों की गर्जना गूंजती रही, ट्रैक्टर-ट्रॉलियाँ मिट्टी ढोती रहीं—लेकिन पुलिस और प्रशासन गहरी नींद में सोए रहे।
सबसे हैरानी की बात यह कि जब ग्रामीणों ने मामले की सूचना खनन विभाग को देनी चाही, तो खनन अधिकारी का फ़ोन ही नहीं उठा।
ग्रामीणों ने तुरंत उपजिलाधिकारी सरोजिनी नगर को भी व्हाट्सऐप पर पूरे मामले की जानकारी भेजी, लेकिन घंटों बीतने के बाद भी कोई जवाब नहीं आया, न ही किसी अधिकारी ने मौके पर जाना उचित समझा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध खनन का यह कारोबार पुलिस, खनन विभाग और प्रशासन की मिलीभगत से ही फल-फूल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है—
“हर रात खनन माफिया पूरी तैयारी के साथ आते हैं… इतने बड़े पैमाने पर खनन बिना संरक्षण के संभव ही नहीं।”
सरकारी चरागाह की भूमि पर हो रहा यह अवैध खनन न सिर्फ़ कानून का उल्लंघन है बल्कि गाँव की सामुदायिक ज़मीन और पर्यावरण पर सीधा हमला भी है। इससे पहले भी मौन्दा में नहर की ज़मीन से दो बार जमकर खनन किया गया तहसील, पुलिस व सिंचाई विभाग तक सूचना भी दी गयी लेकिन कार्यवाही शून्य रही। इससे साफ पता चलता है कि खनन माफियाओं में काकोरी पुलिस का तनिक भी भय नहीं बचा है।
📌 बड़े सवाल खड़े होते हैं—
- क्या काकोरी में खनन माफिया प्रशासन से अधिक ताक़तवर हो चुके हैं?
- जब ग्रामीण जाग रहे हैं, तो पुलिस-प्रशासन क्यों सो रहा है?
- क्या सरकारी ज़मीन की लूट रोकने वाला कोई नहीं?
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और लोग मांग कर रहे हैं कि माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई हो, तथा पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी भी तय की जाए।
काकोरी में अवैध खनन का यह मामला लगातार बढ़ रही प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीर पेश करता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हैं या फिर खनन माफियाओं का यह नंगा नाच यूँ ही चलता रहेगा।

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