शाहजहाँपुर | 31 दिसंबर, 2025
प्रदेश सरकार किसानों के सर्वांगीण विकास एवं उनकी आय बढ़ाने के लिए निरंतर संकल्पित होकर कार्य कर रही है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि जब अन्नदाता किसान समृद्ध होगा, तभी प्रदेश और देश समृद्ध बनेंगे। इसी सोच के अनुरूप विगत आठ वर्षों से प्रदेश के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ लगातार दिया जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था में किसान स्वयं अपनी उपज को क्रय केंद्रों पर बेच रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य प्राप्त हो रहा है।
प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को स्वॉयल हेल्थ कार्ड, फसल बीमा योजना तथा समय पर कृषि इनपुट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। गन्ना किसानों के लिए गन्ना मूल्य भुगतान के क्षेत्र में प्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कृषि मंडियों के आधुनिकीकरण, ग्रामीण क्षेत्रों तक सड़क नेटवर्क के विस्तार तथा वैल्यू चेन स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग में निवेश से किसानों को सीधे बाजार से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही निर्यात की संभावनाओं को भी बढ़ावा दिया गया है।
प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है। नहरों, पाइपलाइनों, माइक्रो इरिगेशन, सोलर पंप, जल संरक्षण अभियानों तथा ड्रोन डोजिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा रहा है। एफपीओ, स्टार्टअप आधारित खेती, प्राकृतिक खेती, खरपतवार नियंत्रण और मृदा परीक्षण जैसे क्षेत्रों में भी किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार से ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल मंडी, एक्सप्रेस-वे और लॉजिस्टिक्स पार्क के माध्यम से किसानों की उपज अब राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक आसानी से पहुँच रही है।
विश्व बैंक के सहयोग से प्रदेश में ‘यू.पी. एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइजेज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग प्रोजेक्ट (यू.पी. एग्रीज)’ प्रारंभ किया गया है। इस परियोजना के अंतर्गत पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं बुंदेलखंड के 28 कम कृषि वृद्धि वाले जनपदों को 4,000 करोड़ रुपये की लागत से छह वर्षों के लिए जोड़ा गया है। कभी जल संकट से जूझने वाला बुंदेलखंड आज पर्याप्त जल संसाधनों से सशक्त हो रहा है।
किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए ओडीओपी योजना, स्वयं सहायता समूह, बीसी सखी, ड्रोन दीदी जैसी पहलें गांव-गांव तक रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा दे रही हैं। प्रदेश के नौ क्लाइमेटिक जोन के अनुसार बीज और तकनीक उपलब्ध कराई जा रही है। सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ डीबीटी के माध्यम से पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुँचाया जा रहा है।
प्रदेश में वर्तमान में 122 चीनी मिलें संचालित हैं। एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर तक पहुँच चुका है, जिससे उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। आलू, केला, फल-सब्जी, औद्यानिक और जैविक फसलों के उत्पादन में प्रदेश ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। गन्ना किसानों के लिए एसएपी 400 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत प्रदेश के 2 करोड़ 86 लाख किसान लाभान्वित हो रहे हैं। उन्नत बीज उपलब्ध कराने के लिए भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के नाम पर लखनऊ में सीड पार्क का निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश में 79 कृषि विज्ञान केंद्र सक्रिय हैं, जबकि शेष केंद्रों का कार्य प्रगति पर है। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण एवं फसल प्रदर्शन की सुविधा मिल रही है, जिससे कृषि को नई दिशा मिल रही है।
कुल मिलाकर, प्रदेश में लागू सुदृढ़ कृषि नीतियों और योजनाओं के कारण किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं और उनकी आर्थिक स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है।
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