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प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों से बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को मिल रहा अनुपूरक पुष्टाहार


 स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव ✍🏻 

शाहजहाँपुर, 06 फरवरी 2026।

देश से कुपोषण दूर करने के उद्देश्य से भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बाल विकास एवं महिला कल्याण से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। उत्तर प्रदेश के बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों, स्कूल न जाने वाली किशोरी बालिकाओं तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को समुचित पोषण, स्वास्थ्य सेवाएँ, टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच, पोषण शिक्षा, प्री-स्कूल शिक्षा एवं परामर्श सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियाँ लाभार्थियों को अनुपूरक पुष्टाहार वितरण, गृह भ्रमण, पोषण संबंधी परामर्श तथा बच्चों की वृद्धि निगरानी जैसे कार्यों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

अनुपूरक पुष्टाहार से करोड़ों लाभार्थी लाभान्वित

भारत सरकार की सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 गाइडलाइन के तहत 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं तथा कुपोषित बच्चों सहित प्रदेश में लगभग 166 लाख लाभार्थियों को प्रत्येक माह टेक-होम राशन (टीएचआर) के रूप में अनुपूरक पुष्टाहार वितरित किया जा रहा है।

प्रदेश के 43 जनपदों में स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित 204 टीएचआर उत्पादन इकाइयों के माध्यम से 311 बाल विकास परियोजनाओं में रेसिपी आधारित पुष्टाहार—जैसे आटा-बेसन प्रीमिक्स, दलिया-मूंग दाल खिचड़ी, हलवा एवं एनर्जी-डेंस खाद्य—की आपूर्ति की जा रही है। जहाँ आवश्यक है, वहाँ नैफेड एवं खाद्य एवं रसद विभाग के माध्यम से फोर्टिफाइड दलिया, चना दाल, खाद्य तेल एवं फोर्टिफाइड चावल उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

तकनीक से पारदर्शिता और गुणवत्ता में सुधार

लाभार्थियों के पंजीकरण और पुष्टाहार वितरण में फेस रिकग्निशन सिस्टम का उपयोग कर पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाई गई है। बेहतर पोषण सेवाओं का परिणाम यह है कि 0-5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में नाटापन, दुबलापन और अल्पवजन की दरों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है, साथ ही पुष्टाहार वितरण की पहुँच भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।

किशोरी बालिकाओं के लिए विशेष योजनाएँ

प्रदेश के आकांक्षात्मक जनपदों में 14-18 वर्ष की किशोरी बालिकाओं को पोषण एवं गैर-पोषण दोनों प्रकार की सेवाएँ दी जा रही हैं। पोषण घटक के तहत पुष्टाहार वितरण, जबकि गैर-पोषण घटक में आयरन-फोलिक एसिड, स्वास्थ्य जाँच, पोषण शिक्षा, स्वच्छता जागरूकता तथा कौशल प्रशिक्षण शामिल हैं। फतेहपुर और सोनभद्र में 16-18 वर्ष की बालिकाओं हेतु कौशल प्रशिक्षण का पायलट प्रोजेक्ट भी संचालित है।

हॉट कुक्ड मील और प्री-स्कूल शिक्षा से बेहतर विकास

3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए हॉट कुक्ड मील योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ताजा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्ष 2023 में प्रारम्भ इस योजना से बच्चों की उपस्थिति, नामांकन और पोषण स्तर में सकारात्मक सुधार हुआ है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 35.46 लाख बच्चों को इसका लाभ मिल रहा है।

इसके साथ ही ईसीसीई (Early Childhood Care and Education) के अंतर्गत प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा को मजबूत करने हेतु आंगनबाड़ी केन्द्रों को प्री-स्कूल किट एवं शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाती है।

कुपोषण मुक्त भविष्य की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश

समन्वित प्रयासों, तकनीकी नवाचारों और व्यापक पोषण सेवाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश कुपोषण उन्मूलन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आंगनबाड़ी केन्द्र न केवल पोषण वितरण का माध्यम बने हैं, बल्कि स्वस्थ, सशक्त और शिक्षित नई पीढ़ी के निर्माण की मजबूत आधारशिला भी सिद्ध हो रहे हैं।



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