शाहजहाँपुर, 06 फरवरी 2026।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद पर्यटन क्षेत्र में व्यापक और ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिला है। राज्य सरकार ने पर्यटन को केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तक सीमित न रखते हुए इसे आर्थिक विकास, निवेश संवर्धन और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम बनाया है। दूरदर्शी नीतियों, मजबूत बुनियादी ढांचे और बेहतर कनेक्टिविटी के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटकों की संख्या के मामले में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है तथा पर्यटकों की संख्या में निरंतर रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की जा रही है।
प्रदेश में पर्यटन विकास का मुख्य आधार आध्यात्मिक सर्किट का सुदृढ़ीकरण रहा है। अयोध्या धाम में श्रीराम मंदिर निर्माण और भव्य दीपोत्सव जैसे आयोजनों ने अयोध्या को वैश्विक पहचान दिलाई है। जहां वर्ष 2017 से पूर्व यहां सीमित संख्या में श्रद्धालु आते थे, वहीं अब यह संख्या करोड़ों तक पहुँच चुकी है।
वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। गंगा आरती, रिवरफ्रंट विकास और अलकनंदा क्रूज जैसे आकर्षणों ने पर्यटन अनुभव को नया आयाम दिया है। ब्रज तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन क्षेत्र के कुंडों एवं मंदिरों का जीर्णोद्धार कर सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया गया है।
राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। नई पर्यटन नीति-2022 के तहत होटल एवं रिसॉर्ट परियोजनाओं को औद्योगिक दरों पर बिजली-पानी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
पर्यटकों की यात्रा को सुगम बनाने के लिए हवाई, सड़क और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी गई। कुशीनगर और जेवर (नोएडा) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के साथ अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास ने प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाया है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों ने पर्यटन स्थलों के बीच दूरी और यात्रा समय को उल्लेखनीय रूप से कम किया है।
धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्रदेश में ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया गया है। दुधवा, पीलीभीत और कतर्नियाघाट टाइगर रिजर्व में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार कर प्रकृति-आधारित पर्यटन को नई दिशा दी गई है। यूपी ईको-टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड का गठन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।
ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने हेतु होमस्टे योजना लागू की गई, जिससे स्थानीय संस्कृति का अनुभव पर्यटकों तक पहुँचने के साथ ग्रामीणों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ-2025 विश्व के सबसे बड़े सुव्यवस्थित धार्मिक आयोजनों में शामिल रहा, जिसने प्रदेश की वैश्विक प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ किया।
अयोध्या का दीपोत्सव, बरसाना का रंगोत्सव और वाराणसी की देव दीपावली जैसे भव्य आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। इन आयोजनों ने उत्तर प्रदेश की पहचान केवल ताजमहल तक सीमित न रखकर उसे भारत की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित किया है।
वर्ष 2017 के बाद पर्यटन क्षेत्र में हुए इस व्यापक विकास ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ होटल, परिवहन, गाइड सेवा और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में करोड़ों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए हैं।
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शाहजहॉपुर
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