[ विशेष रिपोर्ट / लखनऊ ]
ब्यूरो रिपोर्ट: शशांक मिश्रा, लखनऊ ✍️
पंचायती राज दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ के सरोजनी नगर ब्लॉक में पंचायत सहायकों का भारी आक्रोश देखने को मिला। डिजिटल इंडिया की रीढ़ कहे जाने वाले इन कर्मियों ने सुविधाओं के अभाव और बेहद कम मानदेय के विरोध में खंड विकास अधिकारी (BDO) और सहायक विकास अधिकारी (ADO) को अपना मांग पत्र सौंपा।
मुख्य मांगें: पंचायत सहायकों ने प्रमुख रूप से उच्च क्षमता वाले स्मार्टफोन, मानदेय को बढ़ाकर ₹18,000 से ₹25,000 करने, कोषागार से नियमित भुगतान और सेवा को नियमित कर स्थायी दर्जा देने की मांग उठाई है।
दर्जनों योजनाओं का बोझ, संसाधन शून्य: पंचायत सहायकों का कहना है कि वे आयुष्मान भारत, पीएम आवास, मनरेगा, परिवार रजिस्टर और जन्म-मृत्यु पंजीकरण जैसे दर्जनों कार्य डिजिटल माध्यम से करते हैं, लेकिन उन्हें संसाधन नहीं दिए गए। वर्तमान मानदेय ₹6000 राज्य की न्यूनतम मजदूरी ₹16,025 से भी काफी कम है।
पंचायत सहायकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है, तो वे आगे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। "सच की आवाज वेब न्यूज" जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले इन योद्धाओं की मांगों का समर्थन करता है ताकि योजनाओं का लाभ जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।
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