स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव उत्तरप्रदेश ✍🏻
लखनऊ। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का गौरवशाली इतिहास एक बार फिर चर्चा में रहा, जब यह जानकारी सामने आई कि लखनऊ में पहला मोबाइल फोन कनेक्शन जुलाई 1996 में सूचना निदेशक के नाम लिया गया था। इतना ही नहीं, इंटरनेट का पहला कनेक्शन भी लखनऊ में सूचना विभाग के नाम ही लिया गया था।
यह बात यूपी के तीन बार सूचना निदेशक रहे वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारी श्री रोहित नंदन ने सूचना भवन ऑडिटोरियम में आयोजित “रिटायर्ड इन्फॉर्मेशन जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन” के प्रथम सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि सूचना विभाग सरकार की आंख और कान रहा है और आज भी तकनीक व लेखनी के समन्वय से अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन हो या इंटरनेट, सबसे पहले सूचना विभाग तक पहुंचना इस विभाग की महत्ता को दर्शाता है।
श्री रोहित नंदन ने कहा कि सूचना विभाग के अधिकारियों के कार्यों से सरकार की छवि बनती है और आमजन के मन में सरकार की सकारात्मक छवि स्थापित करना आसान कार्य नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि सूचना निदेशक पद की गरिमा उसके प्रभाव और सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच से जुड़ी होती है।
पूर्व मुख्य सचिव एवं पूर्व चुनाव आयुक्त श्री अनूप चंद्र पांडेय, जो दो बार सूचना निदेशक भी रहे, ने कहा कि अपने लंबे प्रशासनिक जीवन में अनेक बड़े पदों पर कार्य करने के बावजूद सूचना निदेशक का कार्यकाल उनके लिए सबसे यादगार रहा। उन्होंने बताया कि सूचना निदेशक का पद सरकारी तंत्र में शक्ति का केंद्र माना जाता है।
उन्होंने एक दिलचस्प प्रसंग साझा करते हुए बताया कि एक बार बजट से जुड़ी प्रेस विज्ञप्ति में जो लिखा गया था, वह बजट में नहीं था, लेकिन विधानसभा में बहस के बाद सरकार ने सूचना विभाग के प्रेस नोट को ही सही माना। इससे विभाग की विश्वसनीयता और प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति राघवेंद्र कुमार ने कहा कि सूचना विभाग ने न्यायपालिका से जुड़े कार्यों के प्रचार-प्रसार के माध्यम से आमजन में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत किया है।
इस अवसर पर एसोसिएशन की पत्रिका “रिज़वा” का लोकार्पण भी किया गया। साथ ही श्री रोहित नंदन को अशोक प्रियदर्शी स्मृति सूचना सम्मान तथा श्री अनूप चंद्र पांडेय को उमेश कुमार सिंह चौहान स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा सूचना विभाग के कई पूर्व अधिकारियों—विजय राय, राजगोपाल सिंह वर्मा, हामिद अली खां, ज्ञानवती, फौज़दार माली, दिनेश सहगल, अशोक कुमार शर्मा, अशोक बनर्जी, अमजद हुसैन, शिव प्रसाद भारती और दशरथ प्रसाद यादव को भी सम्मानित किया गया।
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