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"छात्र आत्महत्याएँ राष्ट्र के लिए गंभीर चेतावनी": विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा—अंक नहीं, बच्चों को भावनात्मक सुरक्षा की जरूरत

[ विशेष कवरेज / सामाजिक सरोकार ]

प्रबंध संपादक: शशांक मिश्रा, लखनऊ ✍️

लखनऊ | 11 मई, 2026 सच की आवाज वेब न्यूज - ओपिनियन

रोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने एनसीआरबी के ताज़ा आंकड़ों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए देश में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं को एक सामाजिक और सभ्यतागत संकट बताया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में 14,488 छात्रों का जीवन समाप्त करना यह दर्शाता है कि समाज को अब सफलता की परिभाषा बदलनी होगी।

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के मुख्य विचार:
  • सांख्यिकी नहीं, चेतावनी: प्रतिदिन लगभग 40 युवा जीवन से हार मान रहे हैं, जो हमारी शिक्षा व्यवस्था पर बड़े प्रश्न चिह्न लगाता है।
  • दबाव बनाम विकास: बच्चों पर केवल अंकों और वेतन का दबाव डालने के बजाय उनके मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देना अनिवार्य है।
  • प्रेरणादायक उदाहरण: उन्होंने चर्चिल और लिंकन का हवाला देते हुए कहा कि असफलताएँ जीवन का अंत नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का साहस ही महत्वपूर्ण है।

अभिभावकों और शिक्षकों से अपील: डॉ. सिंह ने कहा कि बच्चों को यह महसूस होना चाहिए कि उनका परिवार उनसे केवल उनकी सफलता के लिए नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व के लिए प्रेम करता है। उन्होंने स्कूलों में परामर्श व्यवस्था, योग और कला जैसी गतिविधियों को शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाने पर जोर दिया।

युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने भावुक अपील की कि जीवन किसी एक परीक्षा या परिणाम से कहीं बड़ा है। तनाव या निराशा की स्थिति में चुप न रहें, संवाद करें। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि युवा मानसिक रूप से सशक्त बनेंगे, तभी भारत 21वीं सदी का नेतृत्व कर सकेगा।

नया दृष्टिकोण:
ब्रिटेन, फिनलैंड और ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर भारत को भी अब रचनात्मकता और भावनात्मक संतुलन आधारित शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देनी होगी।
युवा शक्ति का सम्मान, सुरक्षित भविष्य का निर्माण।

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