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शाहजहाँपुर: कुलपति प्रो. पी.बी. सिंह को भेंट की गई शोधपरक पुस्तक 'गांधी...

 

📚 अकादमिक प्रभाग गौरव / 'गांधी विचार' पुस्तक भेंट
✍️ स्टेट ब्यूरो हेड: योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश
📅 शाहजहाँपुर | 25 मई, 2026
🌐 सच की आवाज वेब न्यूज — स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय विशेष: संकल्प भारत शोध न्यास की अनूठी साहित्यिक कृति, १५ उच्च स्तरीय शोध लेखों का संकलन, कुलपति भवन में हुआ मुख्य संवाद

शाहजहाँपुर। अकादमिक शोध को बढ़ावा देने, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दर्शन को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में सहेजने तथा विश्वविद्यालयीय स्तर पर उच्च बौद्धिक विलेखों को स्थापित करने की दिशा में स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय (SS College) में एक महत्वपूर्ण साहित्यिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। 'संकल्प भारत शोध न्यास' द्वारा प्रकाशित अत्यंत प्रतिष्ठित एवं बहुचर्चित पुस्तक **'गांधी विचार'** को विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति **प्रोफेसर पी.बी. सिंह** को सप्रेम भेंट किया गया। कुलपति भवन के मुख्य नोडल पटल पर आयोजित इस शिष्टाचार भेंट के दौरान पुस्तक की वैचारिक प्रासंगिकता एवं गांधीवादी जीवन मूल्यों पर गंभीर व पारदर्शी अकादमिक चर्चा की गई।

📖 डॉ. स्वप्निल यादव के संपादन में तैयार हुई है अनूठी कृति, समाहित हैं १५ शोध लेख:

प्राप्त प्रामाणिक विलेख के अनुसार, इस कालजयी पुस्तक का मुख्य संपादन प्रबुद्ध शिक्षाविद **डॉ. स्वप्निल यादव** द्वारा किया गया है तथा इसके सह-संपादक के रूप में **ललित हरि मिश्रा** ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उल्लेखनीय है कि इस पुस्तक में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन दर्शन, राजनीतिक सिद्धांतों, सामाजिक समरसता और वर्तमान वैश्विक सर्विलांस में उनके विचारों की उपयोगिता से संबंधित १५ उच्च स्तरीय अकादमिक शोध लेखों को संकलित व प्रकाशित किया गया है। पुस्तक का विमोचन गत वर्ष ही शाहजहाँपुर के लोकप्रिय जिलाधिकारी **श्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह** के कर-कमलों द्वारा कलेक्ट्रेट सभागार में भव्य रूप से किया गया था।

📜 'गांधी विचार' साहित्यिक कृति एवं अकादमिक कमान मैट्रिक्स:
📊 साहित्यिक प्रकाशन एवं संपादन मंडल 🔬 पुस्तक की वैचारिक विशेषता व विलेख
मुख्य प्रकाशक संस्थान: संकल्प भारत शोध न्यास।
प्रधान संपादक पटल: डॉ. स्वप्निल यादव।
सह-संपादक प्रभाग: ललित हरि मिश्रा।
ऐतिहासिक विमोचन कमान: जिलाधिकारी श्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह।
शोध लेखों की संख्या: १५ विशिष्ट ऐतिहासिक एवं सामाजिक शोध पत्र शामिल।
अभूतपूर्व शोध संबोधन: बापू को शोध साक्ष्यों के आधार पर 'विदेह' संबोधित करने वाली यह पहली पुस्तक है।
भेंटकर्ता नोडल प्रविष्टि: अनुराग यादव एवं ललित हरि मिश्रा।
🛡️ गांधी जी के आत्मिक और दार्शनिक स्वरूप पर नया विलेख, कुलपति ने की सराहना:

कुलपति प्रो. पी.बी. सिंह को यह पुस्तक **श्री अनुराग यादव** एवं सह-संपादक **ललित हरि मिश्रा** द्वारा संयुक्त रूप से सादर भेंट की गई। इस पुस्तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक विशेषता यह है कि यह हिंदी साहित्य और इतिहास जगत की ऐसी प्रथम पुस्तक है, जिसमें ठोस ऐतिहासिक व दार्शनिक शोध साक्ष्यों के आधार पर महात्मा गांधी जी को 'विदेह' (देह के बंधनों से मुक्त, आत्मनिष्ठ योगी) संबोधित कर उनके विराट व्यक्तित्व का पारदर्शी मूल्यांकन किया गया है। कुलपति महोदय ने पुस्तक के संपादन मंडल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शोधपरक ग्रंथ भावी पीढ़ी को बापू के मूल सिद्धांतों से विधिक और आध्यात्मिक रूप से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं।

बापू को 'विदेह' के रूप में प्रतिपादित करना शोध न्यास की एक उत्कृष्ट वैचारिक कीर्तिमान है

"महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और स्वावलंबन के सिद्धांतों पर वैश्विक मंचों पर पर्याप्त लेखन हुआ है, परंतु संकल्प भारत शोध न्यास द्वारा संपादित 'गांधी विचार' पुस्तक ने उन्हें 'विदेह' के रूप में स्थापित कर शोध का एक सर्वथा नया नोडल आयाम खोला है। डॉ. स्वप्निल यादव और ललित हरि मिश्रा का यह भगीरथ प्रयास विश्वविद्यालय के पुस्तकालय प्रभाग और शोधार्थियों के लिए एक अमूल्य विलेख धरोहर सिद्ध होगा। किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके वैचारिक व अकादमिक सुशासन पर निर्भर करती है और यह पुस्तक उच्च शिक्षा के गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह खरी उतरती है। इस उत्कृष्ट और पारदर्शी लेखन के लिए संपूर्ण संपादन मंडल बधाई का पात्र है।" — माननीय कुलपति प्रोफेसर पी.बी. सिंह

स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय परिसर, गांधी अध्ययन केंद्र, जिला कलेक्ट्रेट प्रशासनिक प्रभाग, युवा इतिहासकार परिषदों, स्थानीय प्रबुद्ध शिक्षक संघों और कलेक्ट्रेट जनसुनवाई मंचों से जुड़े संपूर्ण शाहजहाँपुर जनपद के सम्मानित प्रबुद्ध नागरिकों, प्रबुद्ध साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने 'संकल्प भारत शोध न्यास' द्वारा इस अनूठी पुस्तक को कुलपति महोदय को भेंट करने तथा अकादमिक विमर्श को नई धार देने के इस कदम की खुले दिल से सराहना की है। विश्वविद्यालय समन्वय सेल ने पुनः समस्त छात्र-छात्राओं और युवा शोधार्थियों से विधिक व विनम्र अपील की है कि वे पाश्चात्य संस्कृति की विसंगतियों से दूर रहकर अपने देश के महापुरुषों के मूल सिद्धांतों, नैतिक दर्शन और ऐतिहासिक विलेखों का गहन अध्ययन करें। किसी भी भ्रामक या तोड़-मरोड़ कर पेश की गई अफवाहों पर ध्यान न देकर पुस्तकालयों में बैठकर प्रामाणिक इतिहास खंगालें; क्योंकि ज्ञान और सही वैचारिक चेतना ही सुशासित, सशक्त और समर्थ अखंड भारत की अभेद्य ढाल है।

📍 अकादमिक पटल उपस्थिति: इस गरिमामयी शिष्टाचार भेंट के पावन अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्यों में मुख्य रूप से प्रो. अनुराग अग्रवाल, प्रो. प्रभात शुक्ला, प्रो. कमलेश गौतम, प्रो. मोहम्मद सलीम खान, डॉ. मोहम्मद अरशद खान, डॉ. आलोक कुमार सिंह, डॉ. शिशिर शुक्ला, डॉ. प्रमोद यादव, कमलेश त्रिवेदी सहित विश्वविद्यालय के शोध संभाग के नोडल प्रभारी व प्रबुद्ध छात्र उपस्थित रहे।

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