शाहजहाँपुर। पुलिस महकमे के नए स्तंभ आरक्षियों को विधिक, अनुशासित और पूरी तरह जनहितकारी पुलिसिंग के सांचे में ढालने के उद्देश्य से जिले के उच्चाधिकारी लगातार धरातल पर सक्रिय हैं। इसी क्रम में गुरुवार को पुलिस अधीक्षक श्री सौरभ दीक्षित द्वारा अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण महोदया एवं क्षेत्राधिकारी पुवायाँ की संयुक्त गरिमामयी उपस्थिति में थाना पुवायाँ परिसर में पुवायाँ सर्किल के अंतर्गत प्रशिक्षणरत व तैनात नवनियुक्त रिक्रूट आरक्षियों के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक गोष्ठी (समीक्षा बैठक) का आयोजन किया गया। गोष्ठी में कप्तान ने नए सिपाहियों को पुलिसिंग की बारीकियों से अवगत कराते हुए वर्दी के विधिक दायित्वों का बोध कराया।
गोष्ठी के दौरान पुलिस अधीक्षक महोदय ने स्पष्ट लफ्ज़ों में निर्देशित किया कि पुलिस सेवा की पहली शर्त कड़ा अनुशासन, समयबद्धता और उत्कृष्ट विधिक व्यवहार है। उन्होंने नए सिपाहियों को निर्देश दिए कि जब भी कोई पीड़ित या फरियादी अपनी विधिक समस्या लेकर आए, तो उसकी बात को अत्यंत संवेदनशीलता और शालीनता के साथ सुना जाए। पीड़ितों की शिकायतों का त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी विधिक निस्तारण सुनिश्चित करना ही उत्तर प्रदेश पुलिस का मूल विज़न है।
| 👮 आचरण, मर्यादा एवं डिजिटल आचरण नीति | 🛡️ धरातल पर इंफोर्समेंट व आधुनिक पुलिसिंग |
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• वर्दी की विधिक गरिमा: प्रत्येक आरक्षी को अपने व्यक्तित्व, वर्दी की शुद्धता तथा विभागीय मर्यादा का विशेष ध्यान रखना होगा। • विभागीय गोपनीयता का पालन: सोशल मीडिया का उपयोग केवल सकारात्मक व जिम्मेदार कार्यों हेतु होगा; किसी भी दशा में विभागीय गोपनीयता भंग नहीं होनी चाहिए। |
• अपराध नियंत्रण व गश्त: रात्रि गश्त (नाइट पेट्रोलिंग) और बीट पुलिसिंग के दौरान सिपाही पूरी तरह अलर्ट रहकर संदिग्धों की विधिक जांच करेंगे। • महिला व यातायात सुरक्षा: नारी सुरक्षा के प्रति अत्यंत संवेदनशील रुख अपनाने तथा व्यस्त चौराहों पर सुगम यातायात व्यवस्था बहाल रखने के विधिक निर्देश। |
पुलिस कप्तान ने आरक्षियों को २१वीं सदी के बदलते अपराधों से निपटने के लिए आधुनिक पुलिसिंग प्रणाली के अनुरूप स्वयं को विधिक व तकनीकी रूप से विकसित करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज का सिपाही जितना तकनीकी रूप से दक्ष होगा, अपराधियों पर विधिक शिकंजा कसना उतना ही आसान होगा। इसके साथ ही, निरंतर विषम परिस्थितियों में ड्यूटी करने के मद्देनजर सिपाहियों को मानसिक व शारीरिक रूप से सदैव चुस्त-दुरुस्त रहने तथा दैनिक योग व व्यायाम को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की विधिक सलाह दी गई।
"पुलिस की नौकरी केवल एक आजीविका नहीं, बल्कि समाज के पीड़ित और शोषित व्यक्ति को विधिक न्याय दिलाने का एक पवित्र माध्यम है। जनता जब संकट में होती है, तो सबसे पहले बीट के आरक्षी को ही याद करती है। ऐसे में आपका एक शालीन शब्द और त्वरित विधिक आचरण विभाग के प्रति जनता के विश्वास को कई गुना मजबूत कर देता है। आगामी त्यौहारों के दृष्टिगत पर्याप्त पुलिस बल की मुस्तैदी और सतर्कता अनिवार्य है; नियमों का उल्लंघन करने वाले अराजक तत्वों से पूरी विधिक कड़ाई से निपटा जाए।"
पुवायाँ थाने में आयोजित इस विधिक गोष्ठी के दौरान सर्किल के सभी थानों के थाना प्रभारी, सम्मानित उपनिरीक्षकगण तथा भारी संख्या में नव-तैनात आरक्षी उपस्थित रहे। कप्तान की इस अनूठी और सीधे संवाद की पहल से नए रंगरूटों में भारी उत्साह देखा गया। कलेक्ट्रेट व पुलिस ऑफिस से जारी बयान के अनुसार, जिले के सभी सर्किलों में नए सिपाहियों की ऐसी व्यावहारिक व विधिक पाठशालाएं निरंतर आयोजित की जाएंगी ताकि जनपद में सुदृढ़ कानून व्यवस्था और पारदर्शी सुशासन का राज हमेशा अक्षुण्ण बना रहे।
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