बलरामपुर। उत्तर प्रदेश शासन की जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत ग्रामीण अंचलों में तैनात चिकित्सा प्रणालियों को पारदर्शी बनाने, कलेक्ट्रेट लोक शिकायत निवारण तंत्र के अनुरूप मरीजों को त्वरित इलाज सुनिश्चित करने हेतु जिला स्वास्थ्य कमान पूरी कड़क नीति अपनाए हुए है। इसी क्रम में आज शनिवार को एक बहुत बड़ा विधिक व दंडात्मक हस्तक्षेप करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) **डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी** ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गैंडास बुजुर्ग का औचक निरीक्षण किया। इस आकस्मिक छापेमारी के दौरान कलेक्ट्रेट रोस्टर की धज्जियां उड़ाने वाली एक गंभीर विसंगति उजागर हुई है, जहाँ उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर होने के बावजूद ७ डॉक्टरों समेत कुल २१ अधिकारी व स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी स्थल से नदारद पाए गए। सीएमओ ने इस घोर अनुशासनहीनता पर कड़ा प्रहार करते हुए केंद्र अधीक्षक को विधिक नोटिस थमा दिया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अस्पताल परिसर में कदम रखते ही सबसे पहले आकस्मिक (इमरजेंसी) कक्ष में उपलब्ध जीवनरक्षक दवाओं, तकनीकी उपकरणों, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और साफ-सफाई के विलेख प्रपत्रों का गहन भौतिक सत्यापन किया। इसके उपरांत मातृ एवं शिशु सुरक्षा (MCH) व्यवस्थाओं का जायजा लेने हेतु वे सीधे प्रसव कक्ष (लेबर रूम) पहुँचे, जहाँ उन्होंने ऑन-ड्यूटी तैनात स्टाफ की कार्यप्रणाली और प्रसव सेवाओं की उपलब्धता को परखा। सीएमओ ने भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधे संवाद स्थापित कर मिल रहे इलाज व चिकित्सा कर्मियों के व्यवहार की गुप्त प्रविष्टि दर्ज की।
| 🩺 अनुपस्थित चिकित्सा अधिकारी (Doctors Profile) | 👩⚕️ पैरामेडिकल, स्टाफ नर्स एवं प्रशासनिक विंग | ⚠️ विधिक कस्टडी ऐक्शन |
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• canड डॉ. आशीष कुमार (चिकित्सा अधिकारी) • डॉ. विजय प्रताप (चिकित्सा अधिकारी) • डॉ. उमाशंकर सिंह (चिकित्सा अधिकारी) • डॉ. समीम (चिकित्सा अधिकारी आरबीएसके) • डॉ. मकसूद अहमद (एमओ आरबीएसके) • डॉ. सलीम अहमद (एमओ आरबीएसके) • डॉ. सकीना युसूफ (महिला एमओ आयुष) • डॉ. रूबी खान (चिकित्सा अधिकारी आरबीएसके) |
• भगवत प्रसाद (वरिष्ठ सहायक) • राकेश कुमार (वरिष्ठ सहायक) • अजीत कुमार (डाटा एंट्री ऑपरेटर) • अवधेश कुमार, अनुराग द्विवेदी (लैब टेक) • शशि पाण्डेय (एलएचवी) • अनिल श्रीवास्तव (ऑप्टोमेट्रिस्ट) • मोहम्मद अकमल (ब्लॉक अकाउंट मैनेजर) • अर्चना सिंह, सोनू कुमारी, प्रिंसी मौर्य (स्टाफ नर्स) • प्रमिला (एएनएम आरबीएसके) | अजीत चौहान |
🛑 अधीक्षक डॉ. शोएब अहमद से स्पष्टीकरण तलब, वेतन आहरण रोकने की विधिक चेतावनी। |
निरीक्षण के दौरान सबसे अधिक चौकाने वाली विसंगति यह रही कि सभी २१ दफ्तरशाहों और चिकित्सा अधिकारियों ने सुबह हाजिरी रजिस्टर में अपनी प्रविष्टि दर्ज कर दी थी, परंतु धरातल पर वे विधिक कस्टडी से पूरी तरह गायब मिले। इस पर सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे राजकीय सेवा नियमावली का खुला उल्लंघन माना। उन्होंने सीएचसी अधीक्षक डॉ. शोएब अहमद के प्रशासनिक सर्विलांस पर सवाल उठाते हुए उनसे स्पष्टीकरण तलब किया है कि उनके नोडल नियंत्रण में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे संचालित हो रही थी। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर अनुपस्थित कर्मियों का वेतन रोकने की विधिक दंडात्मक संस्तुति की जा रही है।
"जनपद बलरामपुर के सुदूर ग्रामीण अंचलों में निवासरत गरीब व असहाय नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समयबद्ध चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सीएचसी गैंडास बुजुर्ग में हाजिरी लगाकर गायब होने की यह विसंगति अक्षम्य है। हमने अनुपस्थित सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों की विधिक फाइलें तलब की हैं। आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए जो कर्मी २४ घंटे तैनात रहने चाहिए, वे अनुपस्थित होकर विधिक कर्तव्य से विमुख हो रहे हैं। नियमित और सतत निगरानी का यह सर्विलांस अभियान निरंतर जारी रहेगा; लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ विधिक सेवा समाप्ति तक की दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।" — मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी
इस औचक विधिक निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग कमान के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें मुख्य रूप से जिला मलेरिया अधिकारी **राजेश पाण्डेय** एवं जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी **अरविंद मिश्रा** भी साक्ष्य प्रविष्टि हेतु उपस्थित रहे। गैंडास बुजुर्ग कस्बा, उतरौला रोड, बंडा अंचल और कलेक्ट्रेट जनसुनवाई मंचों से जुड़े स्थानीय सम्मानित प्रबुद्ध नागरिकों, ग्राम प्रधानों और सामाजिक संगठनों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा समय रहते लापरवाह डॉक्टरों के खिलाफ इस कड़े सर्विलांस प्रहार की खुले दिल से सराहना की है। जिला स्वास्थ्य कमान ने पुनः समस्त सम्मानित क्षेत्रवासियों से विधिक अपील की है कि यदि किसी भी सरकारी प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर अनुपस्थित मिलें या दवाओं के बदले अवैध धन की मांग जैसी विसंगति सामने आए, तो इसकी सीधी विधिक शिकायत कलेक्ट्रेट कंट्रोल रूम या सीएमओ पटल पर दर्ज कराएं, ताकि आपसी समन्वय से पारदर्शी स्वास्थ्य राज स्थापित रहे।
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