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हंसखेड़ा में पुलिस को बदनाम करने की साजिश नाकाम, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर भ्रामक वीडियो वायरल

 

जिला संवाददाता कल्लू उर्फ रजनीश, लखनऊ ✍️

लखनऊ। थाना पारा क्षेत्र के हंसखेड़ा चौराहे पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पुलिस पर लगाए गए मारपीट के आरोपों को आधिकारिक अभिलेखों और पुलिस जांच में निराधार बताया गया है। पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल किए गए वीडियो और दावों के पीछे वास्तविकता कुछ और है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 12 जून 2026 को हंसखेड़ा चौकी प्रभारी उप निरीक्षक मुन्नालाल पुलिस बल के साथ क्षेत्र में यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने और सड़क पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए पैदल गश्त कर रहे थे। इसी दौरान हंसखेड़ा चौराहे पर एक फर्नीचर दुकान द्वारा सड़क पर चारपाई, स्टॉल और अन्य सामान रखकर मार्ग बाधित किए जाने की स्थिति पाई गई।

पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक मार्ग से अतिक्रमण हटाने और यातायात सुचारू करने के निर्देश दिए जाने पर संबंधित दुकानदार आबिद खान ने विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि कार्रवाई से बचने के लिए उसने स्वयं को अधिवक्ता बताते हुए पुलिस पर दबाव बनाने का प्रयास किया तथा चालान प्रक्रिया के दौरान गलत मोबाइल नंबर भी दर्ज कराया।

पुलिस के अनुसार मौके पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, भीड़ एकत्र करने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। हालांकि पुलिस टीम ने संयम बरतते हुए स्थिति को नियंत्रित किया और कानून व्यवस्था बनाए रखी।

मामले में पुलिस अधिनियम की धारा 34 के अंतर्गत चालान की कार्रवाई की गई है तथा सरकारी कार्य में बाधा, भ्रामक सूचना देने और अन्य आरोपों के संबंध में विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

स्थानीय नागरिकों ने भी चौराहे पर लगातार होने वाले अतिक्रमण और जाम की समस्या को लेकर पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी वीडियो या सूचना को सत्यापन के बिना साझा न करें तथा अफवाहों से बचें।

(सच की आवाज़ वेब न्यूज़)

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