स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️
शाहजहाँपुर। अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन, जनपद शाहजहाँपुर द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के सहयोग से "आयुर्वेद की दृष्टि में संचारी रोग" विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद के माध्यम से संचारी रोगों की रोकथाम, स्वास्थ्य संवर्धन और जनजागरूकता पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष डॉ. विजय जौहरी ने की। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में संचारी रोगों का वर्णन "औपसर्गिक रोग" के रूप में किया गया है। आचार्य चरक एवं सुश्रुत ने ऐसे रोगों का उल्लेख किया है, जो दूषित वायु, जल, भोजन तथा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलते हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के आयुष मंत्रालय एवं उत्तर प्रदेश शासन के आयुष विभाग की मंशानुसार आयुर्वेद को जनस्वास्थ्य से जोड़ते हुए संचारी रोगों की रोकथाम के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित संचारी रोग नियंत्रण अभियान में आयुर्वेद चिकित्सकों की सक्रिय भागीदारी से जनजागरूकता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोगों की प्रभावी रोकथाम संभव होगी।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ददरौल के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. गौरव गुप्ता ने वर्षा ऋतु में स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, संतुलित आहार, ऋतुचर्या तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि रोग उत्पन्न होने से पहले ही उनकी रोकथाम करना है।
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. रोहित वर्मा ने कहा कि संचारी रोगों की रोकथाम में जनसहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। व्यक्तिगत स्वच्छता, स्वच्छ वातावरण, सुरक्षित भोजन एवं आयुर्वेद के निवारक सिद्धांतों का पालन कर डेंगू, मलेरिया तथा अन्य मौसमी संक्रामक रोगों के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है।
गोष्ठी में डॉ. राजेन्द्र प्रकाश सक्सेना, डॉ. हितेश गुप्ता, डॉ. रवि सक्सेना, डॉ. रवि वर्मा, डॉ. बृजेश गुप्ता सहित अनेक आयुर्वेद चिकित्सक उपस्थित रहे। अंत में सभी चिकित्सकों ने जनपद में संचारी रोग नियंत्रण अभियान को सफल बनाने तथा आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️
आयुर्वेद से संचारी रोगों की रोकथाम पर मंथन, जनजागरूकता बढ़ाने पर दिया गया जोर
शाहजहाँपुर। अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन, जनपद शाहजहाँपुर द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के सहयोग से "आयुर्वेद की दृष्टि में संचारी रोग" विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद के माध्यम से संचारी रोगों की रोकथाम, स्वास्थ्य संवर्धन और जनजागरूकता बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला सचिव डॉ. विजय जौहरी ने कहा कि आयुर्वेद में संचारी रोगों का वर्णन "औपसर्गिक रोग" के रूप में किया गया है। आचार्य चरक एवं सुश्रुत ने दूषित वायु, जल, भोजन तथा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलने वाले रोगों का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि आयुष मंत्रालय एवं उत्तर प्रदेश शासन के आयुष विभाग की मंशा के अनुरूप आयुर्वेद को जनस्वास्थ्य से जोड़ते हुए संचारी रोगों की रोकथाम और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ददरौल के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. गौरव गुप्ता ने कहा कि वर्षा ऋतु में स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, संतुलित आहार, ऋतुचर्या तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि रोगों की रोकथाम भी है।
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. रोहित वर्मा ने कहा कि संचारी रोगों की रोकथाम में जनसहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। व्यक्तिगत स्वच्छता, स्वच्छ वातावरण, सुरक्षित भोजन और आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर डेंगू, मलेरिया सहित अन्य मौसमी संक्रामक रोगों के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है।
गोष्ठी में डॉ. राजेन्द्र प्रकाश सक्सेना, डॉ. हितेश गुप्ता, डॉ. रवि सक्सेना, डॉ. रवि वर्मा, डॉ. बृजेश गुप्ता सहित अनेक आयुर्वेद चिकित्सक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी चिकित्सकों ने जनपद में संचारी रोग नियंत्रण अभियान को सफल बनाने तथा आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
