लखनऊ। राजधानी लखनऊ के निगोहां थाना क्षेत्र के राजारामखेड़ा गांव से मोबाइल की EMI को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि बकाया किस्त के विवाद में 27 वर्षीय युवक नेवल को घर से ले जाया गया और करीब पांच दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया।
परिवार का यह भी आरोप है कि युवक को ब्लड बैंक ले जाकर उसकी इच्छा के खिलाफ एक यूनिट रक्त निकलवाया गया और बाद में उससे मजदूरी कराई गई। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
8 सितंबर को घर से ले जाने का आरोप
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घटना 8 सितंबर 2026 को हुई। परिवार का आरोप है कि दो लोग गांव पहुंचे और नेवल को अपने साथ ले गए। इसके बाद उसे कई दिनों तक वापस घर नहीं आने दिया गया।
₹2,799 की EMI का विवाद
रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार ने करीब ₹21,500 का मोबाइल फोन किस्त पर लिया था और मासिक किस्त करीब ₹2,799 बताई गई है।
परिवार का कहना है कि बकाया किस्त को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि युवक को साथ ले जाने के बाद उसके परिवार से पहले ₹2,799 की रकम मंगाई गई और बाद में अतिरिक्त रकम की मांग की गई।
ब्लड बैंक ले जाने का दावा
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि युवक को एक ब्लड बैंक ले जाया गया, जहां परिवार के मुताबिक उसकी इच्छा के विरुद्ध एक यूनिट रक्त निकलवाया गया।
हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे परिवार/पीड़ित के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। संबंधित रिकॉर्ड और पुलिस जांच से इस दावे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
पांच दिन तक बंधक रखने का आरोप
परिवार के मुताबिक युवक को इसके बाद सदर इलाके के एक मकान में रखा गया और उससे काम कराया गया।
मीडिया रिपोर्टों में युवक को करीब पांच दिनों तक बंधक रखे जाने की बात सामने आई है। इसके बाद वह परिवार के पास वापस पहुंचा।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस अब आरोपों की जांच, संबंधित लोगों की भूमिका और घटना से जुड़े साक्ष्यों को खंगाल रही है।
जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
इस पूरे मामले में बंधक बनाए जाने, जबरन काम कराने और रक्त निकलवाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
सच की आवाज़ वेब न्यूज़ इस मामले में सामने आने वाली आधिकारिक पुलिस जानकारी और जांच की प्रगति के आधार पर खबर को अपडेट करेगा।
कानूनी नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों, परिवार/पीड़ित की ओर से लगाए गए आरोपों और पुलिस कार्रवाई से संबंधित जानकारी पर आधारित है। आरोपों को न्यायालय द्वारा सिद्ध किए जाने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जाना चाहिए।
रिपोर्ट: सच की आवाज़ वेब न्यूज़
