सह ब्यूरो चीफ सुधीर सिंह कुम्भाणी सीतापुर ✍️
ब्लॉक मुख्यालय से महज दो किलोमीटर दूर गांव में जलभराव का संकट, राशन-दवा जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए ग्रामीण परेशान
सकरन, सीतापुर। क्षेत्र के कम्हरिया कटेसर गांव में बाढ़ का पानी चारों ओर भर जाने से ग्रामीणों के सामने आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बारिश और बाढ़ के दौरान गांव की यही स्थिति हो जाती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों के मुताबिक गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर जाने के कारण आवागमन बाधित हो गया है। राशन, दवा और दूध जैसी जरूरी वस्तुओं के लिए भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जलभराव के चलते ग्रामीणों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
बीमारी का भी बढ़ा खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से पानी भरा रहने के कारण गांव में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। पशुओं के सामने भी चारा और सुरक्षित आवागमन की समस्या खड़ी हो रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से बाढ़ की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक राहत उपलब्ध कराने की मांग की है।
पुलिस की पहुंच को लेकर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि बाढ़ के कारण गांव तक पुलिस और प्रशासन की पहुंच प्रभावित होने से दूर-दराज क्षेत्रों में चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वाले संदिग्ध लोगों के आसपास शरण लेने की सूचनाएं मिल रही हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
पीपा पुल का आश्वासन, लेकिन समाधान का इंतजार
ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ के समय और चुनावों के दौरान पीपा पुल बनवाने के आश्वासन दिए जाते रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि धरातल पर स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ के दौरान गांव का संपर्क प्रभावित होने से उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी सीतापुर से कम्हरिया कटेसर गांव का स्थलीय निरीक्षण कराने तथा तत्काल आवागमन की व्यवस्था के लिए पीपा पुल अथवा स्थायी पुल की व्यवस्था करने की मांग की है। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित परिवारों को आवश्यक राहत सामग्री, दवाएं और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या का अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि ऐसा स्थायी इंतजाम होना चाहिए जिससे हर वर्ष बारिश और बाढ़ के दौरान गांव के लोगों को मुख्यधारा से कटकर रहने को मजबूर न होना पड़े।
