क्षतिग्रस्त मकानों को मिलेगी सहायता, प्रभावित व्यापारियों व मठ-मंदिरों के नुकसान का भी होगा आकलन; 48 घंटे में राहत किट वितरण के निर्देश
स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️
लखनऊ/चित्रकूट। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अतिवृष्टि प्रभावित जनपद चित्रकूट का भ्रमण कर लौटने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही फसलों और मकानों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर पात्र लोगों को नियमानुसार मुआवजा देने के निर्देश दिए।
पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के परिवारों को आवास योजना से जोड़ने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना से जोड़ा जाए। वहीं, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए प्रभावित परिवारों को नियमानुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ने चित्रकूट धाम के प्रभावित व्यापारियों तथा मठ-मंदिरों को हुए नुकसान का आकलन कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में राहत किट का वितरण 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित करने को कहा।
स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था मजबूत रखने पर जोर
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था सुदृढ़ रखने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से राहत कार्यों में किसी प्रकार की शिथिलता न बरतने को कहा।
मंदाकिनी के कैचमेंट एरिया से हटेगा अतिक्रमण
मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण चिह्नित कर नियमानुसार हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके साथ ही नदी पर बने फुट ओवर ब्रिज का सेफ्टी ऑडिट कराने को भी कहा।
उन्होंने पवित्र मंदाकिनी नदी में किसी भी दशा में सीवर और नालों का पानी न जाने देने के लिए पर्यटन, सिंचाई एवं नगर विकास विभाग को आपसी समन्वय से कार्ययोजना तैयार कर लागू करने के निर्देश दिए। घाट के विस्तारीकरण के लिए भी कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।
भविष्य में बाढ़ से नुकसान कम करने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना
मुख्यमंत्री ने राहत एवं पुनर्वास कार्यों के साथ भविष्य में अतिवृष्टि और बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया।
इसके अलावा पशुधन की सुरक्षा, गोशालाओं में पर्याप्त चारे की उपलब्धता तथा लंपी डिजीज से बचाव के लिए आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए।
