एक ही बैठक में पूरा कुरआन-ए-पाक सुनाकर दो छात्रों ने हासिल की बड़ी सआदत

 



ब्यूरो रिपोर्ट प्रमोद मिश्रा

बलरामपुर। महराजगंज तराई स्थित जामिया अहले सुन्नत नूरुल उलूम अतीकिया के लिए गर्व और प्रसन्नता का अवसर है। जामिया के दो होनहार छात्रों ने एक ही बैठक में पूरा कुरआन-ए-पाक ज़बानी सुनाकर हिफ़्ज़-ए-कुरआन की महान सआदत हासिल की। दोनों छात्रों की इस उपलब्धि पर जामिया के शिक्षकों, जिम्मेदारों और परिजनों ने खुशी जाहिर करते हुए उन्हें मुबारकबाद दी और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआएं कीं।

जामिया के छात्र तालिब रज़ा (17 वर्ष) पुत्र अब्दुल मबीन, निवासी मद्रहवा, तुलसीपुर, बलरामपुर ने अपने उस्ताद हज़रत क़ारी शहादत अली क़ादरी के मार्गदर्शन में यह उपलब्धि हासिल की। वहीं, सरफ़राज़ (13 वर्ष) पुत्र हज़रत अली, निवासी बंकसिया, मथुरा बाजार, बलरामपुर ने अपने उस्ताद क़ारी नूरुद्दीन रिज़वी की देखरेख में एक ही बैठक में पूरा कुरआन-ए-पाक ज़बानी सुनाया।

हिफ़्ज़-ए-कुरआन बड़ी नेमत और जिम्मेदारी

हिफ़्ज़-ए-कुरआन केवल एक शैक्षिक उपलब्धि नहीं, बल्कि अल्लाह तआला की ओर से मिलने वाली एक महान नेमत और बड़ी सआदत है। कुरआन-ए-पाक को अपने सीने में महफूज़ करना सौभाग्य की बात है। इसके साथ ही उसकी नियमित तिलावत, लगातार दोहराई, हिफाजत, समझ और उसकी शिक्षाओं पर अमल करने की जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। एक हाफ़िज़ के लिए आवश्यक है कि वह जीवनभर नियमित रूप से कुरआन-ए-पाक की दोहराई करता रहे, ताकि उसका हिफ़्ज़ मजबूत और पायेदार बना रहे।

दोनों छात्रों की इस कामयाबी के पीछे उनकी निरंतर मेहनत, लगन और अनुशासन के साथ-साथ माता-पिता की दुआओं, त्याग और शिक्षकों के समर्पण की अहम भूमिका रही। विशेष रूप से दोनों छात्रों के उस्ताद हज़रत क़ारी शहादत अली क़ादरी और क़ारी नूरुद्दीन रिज़वी की मेहनत, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन सराहनीय रहा।

कार्यवाहक प्रधानाचार्य ने जताई खुशी

जामिया के कार्यवाहक प्रधानाचार्य फैयाज अहमद मिस्बाही ने दोनों छात्रों की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि दीनी मदरसों का मूल उद्देश्य नई पीढ़ी के सीने को कुरआन-ए-पाक के नूर से रोशन करना तथा उन्हें इल्म और अमल के गुणों से सुसज्जित करना है। इस तरह की उपलब्धियां न केवल शिक्षकों और छात्रों का हौसला बढ़ाती हैं, बल्कि दूसरे छात्रों को भी हिफ़्ज़-ए-कुरआन के लिए प्रेरित करती हैं।

अंत में दोनों छात्रों के लिए विशेष दुआ की गई कि अल्लाह रब्बुल इज्जत उनके हिफ़्ज़ को मजबूत और पायेदार बनाए, उन्हें कुरआन-ए-पाक का सच्चा खिदमतगार बनाए तथा उनके माता-पिता और शिक्षकों की मेहनत को शर्फ़-ए-कबूलियत अता फरमाए। साथ ही जामिया अहले सुन्नत नूरुल उलूम अतीकिया को दिन-दूनी, रात-चौगुनी तरक्की अता फरमाने की दुआ की गई।

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