UP : बरेली मे संपत्ति विवाद में माता-पिता का क़त्ल करने वाले कलयुगी पुत्र दुर्वेश को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई हैं । अपर सेशन जज-14 ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने आदेश में रामचरित मानस के उत्तरकांड की चौपाई का उल्लेख किया- ‘जौ नहिं दंड करौं खल तोरा, भ्रष्ट होई श्रुति मारक मोरा’। अर्थात, दोष हेतु दंड न दिया जाए तो श्रुति का मार्ग भ्रष्ट हो जाता है।
"दोषी ने माता-पिता के पवित्र रिश्ते पर कलंक लगाया। उसका अपराध विरल से विरलतम श्रेणी में आता है, इसलिए मृत्यु दंड दिया जाए!"
इस आदेश के बाद पुलिसकर्मी दोषी दुर्वेश को दोबारा जेल ले गए। उसके चेहरे की रंगत उड़ी हुई, सिर झुका हुआ था...।
गोलियों से भून दिए थे मां बाप...
तारीख- 13 अक्टूबर 2020
स्थान- बहरोली गांव
समय- सुबह छह बजे।
सेवानिवृत शिक्षक लालता प्रसाद घर में पूजा कर रहे थे। उनकी पत्नी मोहिनी देवी शौचालय में थीं। मीरगंज कस्बा में किराये के मकान में रहने वाला उनका बड़ा बेटा दुर्वेश कुमार अचानक घर में घुसा, और माता - पिता को तमंचे से तीन गोलियां मारकर हत्या कर दी थी।
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