ब्यूरो रिपोर्ट,सुधीर सिंह कुम्भाणी, सीतापुर ✍️
सकरन (सीतापुर) — केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन के तहत पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों में प्रशिक्षित युवाओं एवं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। प्रत्येक ग्राम पंचायत में लाखों रुपये की लागत से पेयजल परीक्षण किट उपलब्ध कराई गईं, लेकिन हालात यह हैं कि ये किट सकरन ब्लॉक परिसर में खुले आसमान के नीचे धूल खा रही हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि योजना की शुरुआत में बड़े स्तर पर प्रशिक्षण व जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए थे, लेकिन आज तक न तो गांवों में साफ पानी पहुंच पाया और न ही जल की गुणवत्ता की नियमित जांच हो सकी।
ग्राम पंचायतों में बने नालों और पाइपलाइनों की खुदाई के बाद भी ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जिन जल सखियों और सहायता समूहों को पानी की गुणवत्ता जांचने का कार्य दिया गया था, वे आज तक इस मिशन को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर सकीं। दूसरी ओर ब्लॉक परिसर में रखी लाखों रुपये की परीक्षण किट बिना उपयोग के खराब होने की कगार पर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते हर घर नल योजना पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। जिस योजना पर सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए, उसकी तस्वीर जमीन पर बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों ने जिल प्रशासन से मांग की है कि दोषियों पर कार्रवाई की जाए और पेयजल गुणवत्ता जांच प्रणाली को जल्द बहाल कर ग्रामीणों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जाए।


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